
नई दिल्ली। सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी नई जानकारी सामने आई हे। खबर है कि 4350 सालों पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता का विनाश किसी और वजह से नहीं, बल्कि अकाल के कारण हुआ था। आईआईटी खड़गपुर की एक रिपोर्ट में पता चला है कि यह पौराणिक सभ्यता अकाल के गाल में समा गई थी। रिपोर्ट के अनुसार यह अकाल एक-दो दशक नहीं, बल्कि सदियों तक चला था। आईआईटी खड़गपुर के तथ्य में अकाल की अवधि 900 साल बताई गई है।
रिसर्च में सामने आया सच
हालांकि इससे पहले सामने आई थ्योरी में इस अकाल का समय 200 साल बताया गया था, लेकिन ताजा अध्ययन ने पुरानी रिपोर्ट को गलत तथ्यों पर आधारित बताया। एक अंग्रेजी समाचार पत्र के अनुसार यह रिपोर्ट इस माह एक अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में भी प्रकाशित होगी। बताया गया कि अकाल इतना भयंकर और लंबा था कि सिंधु सभ्यता के लोग वहां से पलायन करने को मजबूर हो गए और धीरे-धीरे सभ्यता का विनाश हो गया। दरअसल, आईआईटी खड़गपुर भूविज्ञान और भूभौतिकी विभाग की एक टीम पिछले 5,000 सालों के दौरान मानसून पर रिसर्च कर रही है। रिसर्च के दौरान टीम को पता चला कि हिमालय के उत्तर-पश्चिम में 900 सालों तक वर्षा नहीं हुई थी। इसका नतीजा यह हुआ कि नदिया और पोखर धीरे-धीरे सूखने लगे और फिर भयंकर अकाल पड़ गया।
सिंधु घाटी की सभ्यता
बता दें कि विश्व कीे प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता प्रमुख रूप से दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों तक फैली थी। ये क्षेत्र आज अफगानिस्तान और पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में पड़ते हैं। मिस्र और मेसोपोटामिया की प्राचीन सभ्यता के साथ ही यह पौराणिक विश्व की सभ्यताओं के तीन शुरुआती कालक्रमों में से एक मानी गई है। हालांकि सभ्यता को लेकर हुई शोधों में इसका कालक्रम अलग-अलग माना गया है। कई शोधों में सभ्यता का कालक्रम 4500 साल से लेकर 8000 साल तक माना गया है।
Published on:
16 Apr 2018 05:20 pm
बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
