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शोध में खुलासा- मस्तिष्क कैसे लचीले ढंग से देता है जटिल जानकारी

मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने खुलासा करते हुए कई महत्वपूर्ण तंत्रिका प्रक्रियाओं को रेखांकित किया है।अध्यन में बताया गया है कि डीप नेटवर्क एवं मानव मस्तिष्क के बीच पहले से अज्ञात गुणात्मक अंतरों को उजागर किया।
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नई दिल्ली

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Shaitan Prajapat

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Updated: 30 Apr 2021, 11:06 AM IST

Brain

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नई दिल्ली। मानव मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारी इच्छाओं, संवेगों, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, चेतना, ज्ञान, अनुभव, व्यक्तित्व इत्यादि का केन्द्र भी होता है। मानव मस्तिष्क किस प्रकार काम करता है। इसके बारे में कई शोध किए जा चुके है। मस्तिष्क मानव निर्णय—प्रक्रिया जटिल सूचनाओं के लचीले प्रसंस्करण पर निर्भर करता है, लेकिन मस्तिष्क कैसे प्रसंस्करण को क्षणिक कार्य की माँगों के अनुकूल बना सकता है, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट के शोधकर्ताओं ने अब यह खुलासा करते हुए कई महत्वपूर्ण तंत्रिका प्रक्रियाओं को रेखांकित किया है। हमारे मस्तिष्क के नेटवर्क तेजी से और लचीले ढंग से ताल से एक 'शोर' की स्थिति में स्थानांतरित हो सकते हैं जब सूचना की प्रक्रिया बढ़ने की आवश्यकता होती है। अध्ययन जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।

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लचीले ढंग से जटिल जानकारी
जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है कि गहरे नेटवर्क यह समझने के लिए एक अच्छा मॉडल है कि मानव मस्तिष्क वस्तुओं की कल्पना कैसे करता है और किस प्रकार से यह बाद वाले से अलग काम करता है। कार चलाना, विभिन्न वित्तीय विकल्पों पर विचार-विमर्श करना या अलग-अलग जीवन रास्तों पर विचार करना भी हमें भारी मात्रा में जानकारी की जरूरत होती है। लेकिन सभी निर्णय समान मांगों को नहीं मानते हैं। कुछ स्थितियों में निर्णय आसान होते हैं क्योंकि हम पहले से ही जानते हैं कि कौन सी जानकारी प्रासंगिक है। अन्य स्थितियों में अनिश्चितता जिसके बारे में जानकारी हमारे निर्णय के लिए प्रासंगिक है, हमें सभी उपलब्ध सूचना स्रोतों की व्यापक तस्वीर लेनी होगी। ऐसे तंत्र जिनके द्वारा मस्तिष्क लचीले ढंग से ऐसी स्थितियों में सूचना प्रसंस्करण को अनुकूलित करता है, पहले अज्ञात थे।

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डीप नेटवर्क और दिमाग के बीच समानताएं
अध्यन में बताया गया है कि डीप नेटवर्क एवं मानव मस्तिष्क के बीच पहले से अज्ञात गुणात्मक अंतरों को उजागर किया। यह बताया गया है कि इन नेटवर्क से स्वाभाविक रूप से उनकी वास्तुकला के आधार पर कौन से दृश्य कार्य किए जा सकते हैं बहुत सारे अध्ययन डीप नेटवर्क और दिमाग के बीच समानताएं दिखाते रहे हैं। लेकिन किसी ने भी वास्तव में व्यवस्थित अंतर को नहीं देखा है। जैसे एक पेड़ की तस्वीर को देखा जाए तो सबसे पहले हमारा मस्तिष्क पत्तियों के विवरण को नोट करने से पहले पेड़ को पूरी तरह से देखेगा। इसी तरह, जब एक चेहरे की तस्वीर प्रस्तुत की जाती है तो मनुष्य पहले चेहरे को एक पूरे रूप में देखते हैं और फिर आंख, नाक, मुंह जैसे बारीक विवरणों पर ध्यान केंद्रित करते है। यह तंत्रिका नेटवर्क और मानव मस्तिष्क समान ऑब्जेक्ट मान्यता कार्यों को पूरा करते हैं। मगर दोनों के बाद के चरण बहुत अलग हैं।