
ruckus as ulema conference
नई दिल्ली। नागरिकता कानून के समर्थन में गुरुवार को राजधानी में आयोजित उलेमा कांफ्रेंस में जमकर हंगामा हुआ। जैसे ही कांफ्रेस शुरू हुई कुछ लोग नागरिकता कानून के खिलाफ पोस्टर-कागज दिखाकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढ़ता देख, आयोजकों ने विरोधियों को आयोजन स्थल से बाहर निकाल दिया। बैठक का आयोजन राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने किया है।
बैठक शुरू होते ही राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के संयोजक संघ के कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने साफ-साफ कहा कि कुछ लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "जो लोग इस्लाम के सच्ची सोच वाले लोग हैं वे आराम से बैठे हैं। आज मीडिया को शैतान और इंसान को पहचान लेना चाहिए और इंसान को ही दिखाना चाहिए।"
इंद्रेश कुमार ने कहा, "मीडिया को इन लोगों को नागरिकता कानून के विरोधियों के रूप में नहीं दिखाना चाहिए। मुसलमानों में करोड़ों लोग अमन परस्त हैं जबकि चंद लोग ही शैतान परस्त हैं।"
वहीं, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा, कुछ लोगों का मानना है कि बोलने की स्वतंत्रता केवल उनके लिए है। वे बहस करने नहीं आए बल्कि हंगामा करने लगे।
दरअसल, राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने देश भर के उलेमाओं से संपर्क साधने के बाद गुरुवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में उलेमा कांग्रेस बुलाई थी, जिसमें देश भर के 200 से अधिक उलेमा और धर्मगुरुओं को बुलाया गया था।
राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के एक पदाधिकारी के मुताबिक, इस सम्मेलन में नागरिकता संशोधन कानून और इससे आ रही दिक्कतों पर चर्चा की जानी थी।
मुस्लिम मंच का मानना है कि देश भर में अफवाह फैलाई जा रही है कि आगे चलकर इस कानून के चलते नागरिकता का सबूत मांग जाएगा। इसलिए इस मुद्दे पर अभियान चलाकर संशय दूर किया जाना चाहिए।
इस सम्मेलन में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों को भी बुलाया गया था, जहां से इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
राष्ट्रीय मुस्लिम मंच द्वारा देश भर के उलेमाओं की इस बैठक में देवबंद, अहले हदीस, बरेली शरीफ और निजामुद्दीन दरगाह जैसे धार्मिक संस्थाओं को बुलाया गया था।
Updated on:
16 Jan 2020 04:59 pm
Published on:
16 Jan 2020 04:54 pm
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