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सबरीमाला में हालात बेकाबू, महिला श्रद्धालुओं को लेकर जा रही गाड़ियों पर पत्थरबाजी

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।
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नई दिल्ली

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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 17 Oct 2018, 12:24 PM IST

sabrimala

सबरीमला: महिलाओं के लिए आज अयप्‍पा का खुलेगा कपाट, श्रद्धालुओं को प्रवेश से रोकने पर बढ़ा तनाव

नई दिल्‍ली। केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर के कपाट को आज शाम को सभी उम्र की महिलाओं के लिए खोल दिया जाएगा। भारी सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद महिलाओं के प्रवेश के विरोध में निलक्कल स्थित बेस कैम्प में प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्‍या में महिला प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों ने महिला श्रद्धालुओं को लेकर जा रही गाड़ियों पर पत्थरबाजी भी की है। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।

सबरीमला मंदिर में प्रवेश को लेकर संग्राम जारी है। इस बीच प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने हिरासत में लेना शुरू कर दिया है। वहींं भगवान अयप्‍पा का दर्शन करने जा रही 10 से 50 साल की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर नहीं पहुंच पा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे लोग महिलाओं को बीच रास्‍ते से ही वापस भेजा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों के इस रुख रवैये से महिलाएं सबरीमाला मंदिर नहीं पहुंच पा रही हैं। वहीं सरकार ने महिलाओं के प्रवेश को देखते हुए निलक्‍कल और पंबा में बड़ी संख्‍या में सुरक्षा बल को तैनात कर दिया है। दूसरी तरफ प्रवेश के खिलाफ निलक्‍कल में बड़ी संख्‍या में महिलाओं का प्रदर्शन का जारी है।

महिलाओं को रोकने से बढ़ा तनाव

केरल के सबरीमला मंदिर में पांच दिनों की मासिक पूजा के लिए आज भगवान अय्यप्पा का कपाट खुल गया है। पहली बार सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने दिया जाएगा। भगवान अयप्‍पा का दर्शन करने के लिए काफी संख्‍या में महिलाएं मंदिर की ओर जाती दिखाई दी हैं। लेकिन मंदिर से 20 किलोमीटर दूर महिलाओं को रोकने की वजह से तनाव बढ़ गया है। हालांकि अभी तक किसी झड़प की सूचना नहीं मिली है।

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आधार शिविर पर महिलाओं को रोका
महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के विरोधी सबरीमाला मंदिर से लगभग 20 किलोमीटर दूर आधार शिविर निलाकल में परंपरागत साड़ी पहने महिलाओं के समूह को प्रत्येक वाहनों को रोक रहे हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हैं। निजी वाहनों के अलावा इस फैसले के विरोधी श्रद्धालुओं ने केरल राज्य पथ परिवहन निगम की बसें भी रोकीं हैं। बसों से युवतियों को बाहर निकलने को कहा जा रहा है। उन्‍हें मंदिर जाने से रोका जा रहा है। हालांकि अभी तक इस बात को लेकर किसी तरह की घटना की सूचना नहीं है।

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कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं
सीएम ने पी विजयन ने साफ कर दिया है कि किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। फैसले के विरोध पर केरल के मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानेंगे। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि हम किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं देंगे। सरकार सबरीमाला मंदिर जाने वाले भक्तों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी।। उन्‍होंने कहा कि सरकार मामले में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी। हमने कोर्ट में कह चुके हैं कि आदेश को लागू किया जाएगा।

राजनीतिक संगठनों का विरोध जारी
भाजपा, कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल कराने को लेकर अड़ी है। इससे क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति है और अनहोनी की आशंकाओं को खारिज नहीं किया जा सकता है।

आत्‍महत्‍या की कोशिश
सबरीमाला पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बड़ी संख्या में केरल की महिलाएं विरोध कर रही हैं और उन्होंने जगह-जगह विरोध मार्च निकाला है। इसी कड़ी में मंगलवार को एक महिला ने सार्वजनिक रूप से फांसी लगाने की कोशिश की जिसे वहां खड़े लोगों ने उसे रोक दिया।