Independence Day 2020: सद्गुरु बोले- विविधता का उत्सव मनाएं और देश के अनोखेपन को कायम रखें

  • Isha Foundation के संस्थापक सद्गुरु ने दिया Independence Day पर प्रेरणादायक संदेश
  • सद्गुरु ने कहा- हमने यह देश समानता के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी विविधता के आधार पर बनाया है
  • विकास और खुशहली की ओर पूरे जोश से बढ़ने का यही समय

नई दिल्ली। हमें देश को उस संभावना की ओर ले जाना चाहिए जिसमें हर इंसान के पास समान अवसर और संभावना हो और उन्हें इस देश में अपने जीवन की पूर्ण अभिव्यक्ति मिले। एक भव्य भारत बनाने में हर किसी की भूमिका है, खासकर इस देश के युवा की - मैं आपसे विनती करता हूं कि आप उठ खड़े हों और सही चीजें करें,’ ईशा फाउण्डेशन ( Isha Foundation ) के संस्थापक, सद्गुरु ( Sadhguru ) ने स्वतंत्रता दिवस ( Independence Day ) के अपने प्रेरणादायक संदेश में कहा।

उन्होंने देशवासियों से अपनी विविधताओं का उत्सव मनाने और भारत के अनोखेपन को कायम रखने का आग्रह किया। ‘हमने यह देश समानता के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी विविधता के आधार पर बनाया है। हर तरीके से हम सबसे रंग-बिरंगे देश हैं। यह काफी अहम है कि हम ऐसे ही बने रहें।

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सद्गुरु महामारी कोरोना वायरस के बाद की दुनिया से मिले। उन्होंने भारत के लिए ‘समान अवसर पैदा करने’ के लिए एकजुट होकर देश के निर्माण में आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने इस वक्त हम नहीं आगे बढ़े तो दूसरे एशियाई देशों की तुलना में विकास के क्षेत्र में 25 वर्ष पीछे रह जाएंगे।

गलतियों को आगे ना खींचें

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि पिछली गलतियों को आगे न खींचें, बल्कि इस मौके की ‘जबरदस्त संभावना’ पर ध्यान केंद्रित करें। ‘जो देश हम हैं वो अपनी बुद्धि, अपने ज्ञान और अपने इतिहास के लिए और जो सांस्कृतिक ताकत हमारी है, उतना मजबूत आधार हमें दूसरे देशों की मंडली में नहीं मिला है। विकास और खुशहली की ओर पूरे जोश से बढ़ने का यही समय है।’

युवाओं के लिए खास संदेश

भारतीय युवा के लिए, जिनके बीच वे जबरदस्त प्रचलित हैं, सद्गुरु का एक खास संदेश था। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा- ‘इस देश के युवा को समझना चाहिए कि इस देश का भविष्य आपके कौशल पर, आपकी काबिलियत पर आपके दृढ़ संकल्प और इस देश में एक प्रेरित तरीके से आपके काम करने पर निर्भर है।’

भारत फैली हुई महामारी के बीच, 74वां स्वतंत्रता दिवस ( Independence Day Celebration ) एक छोटे स्तर पर मना रहा है। लाल किले का पारंपरिक उत्सव, सामान्य रूप से मौजूद रहने वाले लोगों की तुलना में, सिर्फ एक चौथाई लोगों के लिए खुला है।

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स्कूलों में भी इस वर्ष पहले की तरह आजादी का जश्न नहीं मनाया गया और सरकार ने लोगों से घर पर ही रहकर इसे मनाने और विशाल जन समूह बनाने से बचने का अनुरोध किया है।

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धीरज शर्मा
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