
sc rafael
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को रफाल सौदे को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। केंद्र की ओर से एजी केके वेणुगोपाल ने कहा कि ये जनहित याचिका नहीं बल्कि राजनीतिक हित की याचिका है। कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। अगर शीर्ष अदालत याचिका पर नोटिस जारी करता है तो सीधे पीएम को जाता है। इसलिए याचिका पर सुनवाई की जरूरत नहीं है।
SC का नोटिस जारी करने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगर ये मान लीजिए कि मैं आपसे इस डील की जानकारी केवल कोर्ट को देने को कहता हूं? तो क्या आप कोर्ट को देंगे? कोर्ट ने इस मामले में राफेल डील को लेकर फैसले की प्रक्रिया की जानकारी सरकार से मांगी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम केंद्र को नोटिस जारी नहीं कर रहे है। साथ ही हम याचिकाकर्ताओं की दलीलों को भी नहीं रिकार्ड में नहीं ले रहे हैं। ऐसा इसलिए कि उनकी दलीलें पर्याप्त नहीं हैं। हम सिर्फ डील को लेकर फैसले की प्रक्रिया पर खुद को संतुष्ट करना चाहते हैं। हम इस मामले में सूटेबिल्टी और रफाल के दाम पर भी नहीं जा रहे हैं।
अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को
रफाल लड़ाकू विमान सौदे के खुलासे की मांग को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मुद्दे पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि केंद्र सरकार यह बताए कि उसने रफाल सौदे को कैसे अंजाम दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, वह नोटिस नहीं जारी कर रही लेकिन सरकार कोर्ट को 29 अक्टूबर तक सौदे की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी।
इस मामले के याचिकाकर्ता और वकील एमएल शर्मा ने कहा है कि रफाल सौदे में कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इसमें भ्रष्टाचार हुआ है। यह भ्रष्टाचार के विरोध में हुई अंतरराष्ट्रीय संधियों का भी उल्लंघन है। शर्मा ने कहा, 2012 के समझौते के मुताबिक फ्रेंच संसद के सामने पेश की गई रफाल की कीमत 71 मिलियन यूरो है। दासू की वार्षिक रिपोर्ट में भी एयरक्राफ्ट की असली कीमत का जिक्र है। जबकि केंद्र सरकार इसका दाम छिपाना चाह रही है। इस मामले में शर्मा और विनीत ढांडा ने याचिका दाखिल की है। वकील ढांडा ने याचिका दायर करते हुए मांग की है कि फ्रांस और भारत में समझौता क्या है उसे सार्वजनिक किया जाए। यह भी मांग की गई है कि रफाल की वास्तविक कीमत बताई जाए।
पूनावाला ने ली याचिका वापस
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील विनीत ढांडा ने कहा कि अदालत के सामने सब कुछ आना चाहिए। सरकार इस बात की जानकारी शीर्ष अदालत को दे कि उसने किस आधार पर और कितने में सौदा किया। इस मामले में तीसरे याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला ने सुनवाई से ठीक पहले याचिका वापस ले ली।
Updated on:
10 Oct 2018 02:34 pm
Published on:
10 Oct 2018 12:00 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
