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जजों की नियुक्ति में देरी पर SC ने दिल्ली HC को लगाई कड़ी फटकार, कहा- नहीं हो रहा है आपसे तो हमें बताएं

देशभर की अदालतों में 200 से अधिक जजों की नियुक्तियां होनी हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है।

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जजों की नियुक्ति में देरी से नाराज SC ने दिल्ली हाईकोर्ट को लगाई कड़ी फटकार

जजों की नियुक्ति में देरी से नाराज SC ने दिल्ली हाईकोर्ट को लगाई कड़ी फटकार, कहा- आपसे नहीं हो रहा है तो हमें बताएं

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट को जमकर फटकार लगाई है। दरअसल जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने पर नाराज होकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त अंदाज में फटकार लगाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि यदि आप भर्तियां नहीं कर पा रहे हैं तो हमें बताएं, हम यह भी काम देख लेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि आपसे नहीं हो पा रहा है तो फिर बताइए हम यह कार्य आपसे ले लेंगे और फिर इसे एक केंद्रीकृत प्रक्रिया बना देंगे। आपको बता दें कि देशभर की अदालतों में 200 से अधिक जजों की नियुक्तियां होनी हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी को लेकर अब सर्वोच्च अदालत ने नाराजगी जाहिर की और दिल्ली हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाई है।

इससे पहले भी न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच हो चुका है टकराव

आपको बता दें कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब जजों की नियुक्ति को लेकर टकराव सामने आया है। इससे पहले भी कई बार टकराव देखने को मिला है और एक बार फिर से केंद्र सरकार और न्यायपालिका के बीच सीधे तौर पर एक बार फिर से टकराव होता दिखाई दे रहा है। मालूम हो कि जजों की भर्तियों को लेकर न्यायाधीश मदन बी लोकुर और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के बीच जमकर बहस हो चुकी है। इसी वर्ष मई में मणिपुर के एक मामले को लेकर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश लोकुर ने के के वेणुगोपाल से पूछा कि फिलहाल उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की कितनी सिफारिश लम्बित हैं? इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि फिलहाल इसकी जानकारी जुटानी पड़ेगी। इस जवाब को सुनकर जस्टिस लोकुर काफी नाराज हो गए और कहा कि सरकार के साथ यही दिक्कत है कि मौके पर कहती है कि अभी जानकारी जुटानी पड़ेगी। समय रहते ऐसे जरूरी कामों को पूरा करने पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि कॉलेजिम को एक बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए और ज्यादा से ज्यादा नामों को की सिफारिश करनी चाहिए। बता दें कि कुछ दिन पहले ही पांच राज्यों के हाईकोर्ट के लिए नए प्रधान न्यायधीशों के नामों की सिफारिश की गई थी।

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