
इस दिन शरीर का साथ छोड़ अलग हो जाएगी परछाई
नई दिल्ली। शरीर के साथ परछाई का अलग होना मुमकिन नहीं है। मगर इसका अपवाद हमे साल में एक बार जरूर देखने को मिलता है। अममून प्रतिवर्ष दो ऐसे दिन होते हैं, जिसमें परछाई हमारा पीछा छोड़ देती है। खगोलशास्त्र में इस दिन को शून्य छाया दिवस या जीरो शैडो डे कहा जाता है। यह खगोलीय घटना अगले माह तीन जून और उसके बाद नौ जुलाई को होगी। छत्तीसगढ़ में शून्य छाया दिवस को आम लोगों से अवगत कराने के लिए वैज्ञानिक तैयारियां कर रहे हैं।
भारत के कई शहरों दिखेगा नजारा
भारत के कई शहर इन दिनों ‘शून्य छाया दिवस’ का गवाह बन रहे हैं। खगोल विज्ञानी, विद्यार्थी और जिज्ञासु लोग इस दिन तरह-तरह के प्रयोग करते हैं। इस वर्ष भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित निकोबार द्वीप समूह में छह अप्रैल को जीरो शैडो-डे की शुरुआत हुई थी। एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया ने इससे संबंधित एक मैप जारी कर बताया है कि किन तारीखों पर किस जगह ‘शून्य छाया दिवस’ देखा जा सकेगा। भारत में अंडमान-निकोबार, केरल, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत कई राज्यों में इसे देखा जा सकता है।
क्या है शून्य छाया दिवस
कर्क रेखा से भूमध्य रेखा के बीच व भूमध्य रेखा से मकर रेखा के बीच आने वाले स्थान पर शून्य परछाई दिवस आता है। दरअसल यह शून्य परछाई दिवस का वह क्षण होता है जो कुछ पलों के लिए दोपहर 12 बजे के आसपास होता है। सूर्य की किरणें पृथ्वी पर जहां सीधी पड़ती जाती है, वहां शून्य परछाई दिवस कुछ पल के लिए आता है। ठीक उसी प्रकार उत्तर से दक्षिण की ओर सूर्य वापस आते समय ठीक मध्य में उसी अक्षांश पर फिर से शून्य परछाई बनाता है।
Published on:
26 May 2018 02:49 pm
बड़ी खबरें
View Allविविध भारत
ट्रेंडिंग
