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अयोध्या विवादित ढांचा: शिया वक्फ बोर्ड ने SC से कहा, दूसरी जगह मिले तो दावा छोड़ देंगे

बोर्ड ने हलफनामा में कहा कि दूसरी जगह दें तो हम दावा छोड़ देंगे। शिया बोर्ड ने कहा कि शांति से हल निकालना चाहते हैं।

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Prashant Kumar Jha

Aug 08, 2017

नई दिल्ली: रामजन्मभूमि बाबरी विवाद केस में नया ट्वीस्ट आ गया है। शिया वक्फ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। वक्फ बोर्ड से एक तिहाई विवादित हिस्से पर दावा किया है। बोर्ड ने हलफनामा में कहा कि दूसरी जगह दें तो हम दावा छोड़ देंगे। शिया बोर्ड ने कहा कि शांति से हल निकालना चाहते हैं। इस हलफनामे में बोर्ड की ओर से कहा गया है कि भगवान राम का मंदिर अयोध्या में विवादित जमीन पर ही बनाया जा सकता है। हलफनामे में कहा गया है कि मस्जिद, राम मंदिर से एक उचित दूरी पर मुस्लिम आबादी वाले इलाके में बनाई जा सकती है। बोर्ड ने बताया कि मंदिर और मस्जिद दोनों को ही अगर विवादित जमीन पर बनाया जाता है तो यहां पर आए दिन विद्रोह की स्थिति पैदा होगी जिससे बचना चाहिए।

शिया और सुन्नी बोर्ड में फूट

शिया वक्फ बोर्ड ने जो अर्जी दायर की है उसमें कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को मीर बाकी ने बनाया था और वह शिया थे। बोर्ड ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को अड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2010 में आए इलाहाबाद हाइकोर्ट के फैसले के मुताबिक जमीन के एक तिहाई हिस्से पर हक़ उनका है ना कि सुन्नी वफ्फ बोर्ड का। सुन्नी बोर्ड का दावा पूरी तरह से गलत है और ऐसे में शिया वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया जाना चाहिए। बोर्ड ने यह मांग भी की है कि इस मामले को एक कमेटी की ओर से सुलझाया जाना चाहिए।


शिया ने सुन्‍नी बोर्ड पर साधा निशाना
शिया वक्फ बोर्ड ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड शांति पूर्ण तरीके से हल निकालना नहीं चाहता। इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट इसमें उन्हें वक्त दे। इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जज, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी के अलावा और पक्षकार शामिल हों।

क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला ?
दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।


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