नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के चर्चित सौम्या रेप व मर्डर केस में दोषी गोविन्दाचामी की फांसी की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने उसे सिर्फ रेप का दोषी माना और 7 साल की सजा सुनाई। सबूतों के अभाव में गोविन्दचामी को हत्या का दोषी नहीं माना गया। गोविन्दचामी को अब जेल में सिर्फ 16 महीने बिताने हैं क्योंकि वह कई सालों से जेल में ही कैद था।
सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से पूछा कि इस बात के सबूत हैं कि गोविन्दचामी ने ही सौम्या को ट्रेन से फेंका था,अभियोजन पक्ष के पास कोई जवाब नहीं दे पाया। सौम्या कोच्चि के एक सुपरमार्केट में असिस्टेंट थी और सगाई के लिए घर लौट रही थी। इसी दौरान उसके साथ वारदात हुई। त्रिशूर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गोविन्दचामी को फांसी की सजा सुनाई थी। जनवरी 2014 में केरल हाईकोर्ट ने इसे बरकरार रखा। गोविन्दचामी ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस रंजन गोगोई,पीसी पंत और यूयू ललित की पीठ ने सबूतों की कमी के चलते गोविन्दचामी को मर्डर केस में बरी कर दिया।
फैसले पर सौम्या की मां ने कहा कि ये न्याय व्यवस्था की हार है। बेटी को इंसाफ नहीं मिला। एक फरवरी 2011 को 23 साल की सौम्या पैसेंजर ट्रेन से शोरनुर जा रही थी। सौम्या महिलाओं के डिब्बे में अकेली थी। गोविन्दचामी भी महिलाओं के डिब्बे में चढ़ा और उसने सौम्या के साथ लूटपाट की। जब सौम्या ने विरोध किया तो गोविन्दचामी ने उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया।
फिर खुद भी ट्रेन से कूद गया और सौम्या के साथ बलात्कार किया। अगले दिन रेलवे ट्रैक के किनारे सौम्या जख्मी हालत में मिली थी। 6 फरवरी को इलाज के दौरान त्रिशूर के अस्पताल में उसकी मौत हो गई। गोविन्दचामी गोविन्दचामी तमिलनाडु का रहने वाला है। वह आदतन अपराधी है। 2004 से 2008 के बीच वह आठ मामलों में दोषी साबित हो चुका है।