scriptSpecial antivirus technology will be installed in Parliament to prevent corona aerosol infection | कोरोना संक्रमण रोकने के लिए संसद में लगेगा स्पेशल एंटीवायरस सिस्टम, सुरक्षा की 99% गारंटी | Patrika News

कोरोना संक्रमण रोकने के लिए संसद में लगेगा स्पेशल एंटीवायरस सिस्टम, सुरक्षा की 99% गारंटी

 

संसदीय सत्र के दौरान कोरोना व अन्य वायरल संक्रमण को रोकने के लिए यूवी-सी प्रकाश पर आधारित एंटीवायरस सिस्टम केंद्रीय कक्ष, कमेटी और लोकसभा कक्ष में स्थापित किया जाएगा। साथ ही कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन पहले की तरह जारी रहेगा।

नई दिल्ली

Updated: July 14, 2021 07:44:32 pm

नई दिल्ली। पांच दिन बाद यानि 19 जुलाई से संसद का मानूसन सत्र ( Monsoon Session ) शुरू होने जा रहा है। संसद ( Parliament ) सत्र के दौरान सदस्यों को कोरोना संक्रमण की मार से बचाने के लिए विशेष यूवी-सी तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। ताकि 19 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दौरान सांसदों व संसदीय गतिवधियों में शामिल लोगों को कोरोना संक्रमण से निजात मिल सके। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ( CSIR ) द्वारा विकसित हवा में वायरस संक्रमण को रोकने के लिए स्पेशल प्रणाली संसद भवन में स्थापित की जाएगी।
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कोविड प्रोटोकॉल का पालन पहले की तरह अनिवार्य

इस बारे में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) डॉ जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक विशेषज्ञों के साथ चर्चा भी की है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया है कि मानूसन सत्र के दौरान हवा में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए विकसित की गई यूवी-सी तकनीक आधारित प्रणाली को सेंट्रल हॉल, लोक सभा कक्ष और समिति कक्ष (कमेटी रूम) 62 और 63 में स्थापित किया जाएगा। एंटीवायरस प्रणाली को स्थापित करने के बाद भी सभी को कोविड-19 प्रोटोकॉल का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। प्रोटोकॉल के तहत फेस मास्क का उपयोग, उचित सुरक्षित दूरी और भीड़-भाड़ से बचना शामिल है।
संक्रमण से 99% सुरक्षा की गारंटी

सीएसआईआर-सीएसआईओ द्वारा विकसित यूवी-सी एयर डक्ट डिसइंफेक्शन प्रणाली का उपयोग सभागारों, बड़े सम्मेलन कक्षों, कक्षा-कक्षों, मॉल्स आदि में किया जा सकता है। यह प्रणाली वर्तमान परस्थितियों में कोरोना महामारी के प्रति आंतरिक गतिविधियों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में सहायक हो सकता है। इसका उपयोग भवनों, परिवहन वाहनों आदि में भी किया जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी को वेंटिलेशन उपायों, आवश्यक सुरक्षा और उपयोगकर्ता दिशानिर्देशों और परीक्षण किए गए जैव-सुरक्षा मानकों आदि के साथ एक एरोसोल में शामिल सार्स-सीओवी-2 वायरस को निष्क्रिय करने की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है। यूवी सी प्रणाली 99 फीसदी से ज्यादा वायरस, बैक्टीरिया, कवक और अन्य जैव-एरोसोल को 254 एनएम यूवी प्रकाश का प्रयोग करके उपयुक्त खुराक के साथ निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसका सफल प्रयोग हैदराबाद और चंडीगढ़ में किया जा रहा है।
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यूवी-सी वायरस और बैक्टिरिया को रोकने में सक्षम

यूवी-सी 254एनएम अल्ट्रा वायलेट ( यूवी ) प्रकाश के उपयोग के साथ जैव-एरोसोल आदि का उपयोग करके वायरस, बैक्टीरिया, कवक और अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं को निष्क्रिय करता है। इसका उपयोग महामारी के दौरान देखे जा रहे फंगल संक्रमण को कम करने में भी मदद कर सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ( सीएसआईआर ) के अहम योगदान का उल्लेख करते हुए कहा है कि सीएसआईआर को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर एक अद्वितीय दर्जा प्राप्त है।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद ( सीएसआईआर ) से कई दशकों की अपनी उपलब्धियों को संरक्षित और प्रदर्शित करने का आग्रह करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी में एक संग्रहालय स्थापित करने की व्यवहार्यता का पता लगाने की जरूरत है। इस अवसर पर सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. शेखर सी मांडे के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में सीएसआईआर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा, 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के शीर्ष वैज्ञानिकों ने भाग लिया।

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