
पटना। मोदी सरकार ने युवाओं को नौकरी मांगने के बजाए देने के लिए प्रेरित करने के लिए 'स्टार्टअप इंडिया' योजना शुरू की थी। नए आइडिया वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जोर-शोर से प्रचार किया गया। लेकिन ऐसे-ऐसे बिजनेस आइडिया को लेकर आवेदन किए जा रहे हैं जिन्हें देखकर इस योजना के वास्तविक हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। करोड़ों के प्रचार के बाद अब इस योजना के लिए पान की दुकान, आटा चक्की और रिक्शा खरीदने के लिए आवेदन आ रहे हैं।
हजारों आवेदनों में से सौ भी योग्य नहीं
ताजा आंकड़ा बिहार को लेकर सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में अब तक इस योजना के तहत 4635 आवेदन आए, लेकिन इनमें से महज 53 को ही मंजूरी दी गई। हालांकि इनमें से भी सिर्फ 29 को वित्तीय सहायता मिल पाई है। इन्हें 71 लाख रुपए की मदद दी गई है। आपको बता दें कि बिहार के लिए स्टार्टअप इंडिया का बजट 500 करोड़ का है।
...ऐसे-ऐसे आवेदनों की भरमार
हजारों आवेदन खारिज होने की वजह इस योजना की सही समझ नहीं होना है। बिहार के पोर्टल पर आए 4635 आवेदनों में से अधिकांश आटा चक्की, पान की दुकान और ऑटो रिक्शा खरीदने जैसे पारंपरिक व्यवसाय शुरू करने के लिए आवेदन मिल रहे हैं। आपको बता दें कि राज्य में स्टार्टअप के प्रचार-प्रसार पर 295 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
क्या कहते हैं उद्योग मंत्री?
बिहार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह के मुताबिक, लोगों को योजना की ठीक से जानकारी नहीं है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य इनोवेशन की मदद से लोगों की सहूलियत बढ़ाने वाले उद्योग स्थापित करने में मदद करना है। बिहार स्टार्टअप नीति 2017 के कार्यान्वयन के लिए बिहार स्टार्टअप फंड ट्रस्ट का गठन किया गया है और 500 करोड़ रुपये प्रारंभिक कोष का सृजन किया गया है।
Published on:
06 May 2018 04:08 pm
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