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सरदार पटेल की मूर्ति: केवडिया पहुंचकर पीएम मोदी ने किया स्‍टेच्‍यू ऑफ यूनिटी का अनावरण

तीन नवंबर से दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का दर्शन देश और विदेश पर्यटक कर पाएंगे। इसके लिए टिकट बुकिंग का काम शुरू हो गया है।
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नई दिल्ली

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Dhirendra Kumar Mishra

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Updated: 31 Oct 2018, 10:42 AM IST

Sardar patel

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवडिया स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंचकर स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया। कार्यक्रम स्‍थल पर उनके साथ गुजरात के सीएम विजय रूपाणी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत कई बड़े नेता भी मौजूद हैं। इसके साथ ही केवडिया में सुबह से सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और लेजर शो के जरिए स्‍टेच्‍यू का भव्‍य प्रदर्शन भी जारी है।

जश्‍न का माहौल

देश को एक अखंड राष्‍ट्र के रूप में स्‍थापित करने वाले लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में बना स्‍टेच्‍यू ऑफ यूनिटी गुजरात में बनकर तैयार है। दुनिया की सबसे ऊंची इस प्रतिमा का अनावरण करने पीएम नरेंद्र मोदी फूलों की घाटी पहुंच चुके हैं। वहां पर अनावरण को लेकर सांस्‍कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गया है। केवडिया में इस समय जश्‍न का माहौल है। थोड़ी देर बाद पीएम पटेल की प्रतिमा को राष्ट्र को समर्पित कर देंगे। दुनिया की सबसे ऊंची इस प्रतिमा का अनावरण आज पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे। साथ ही पीएम पटेल की प्रतिमा को राष्ट्र को समर्पित कर देंगे। बता दें कि आज ही सरदार पटेल की 143वीं जयंती भी है। पीएम मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में यूनिटी ऑफ स्‍टेच्‍यू बनाने का वादा देश के मतदाताओं से किया था।

दुनिया के अजूबों में होगा शुमार
यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इस बात की संभावना है कि पटेल की याद में बना ये प्रतिमा बहुत जल्द दुनिया का एक अजूबा बन जाएगा। 182 मीटर ऊंची इस मूर्ति को बनाने में हजारों मजदूर व सैकड़ों इंजीनियर 44 महीनों तक जुटे रहे। अमरीका, चीन से लेकर भारत के शिल्पकारों ने इसे तैयार करने में भारी मेहनत की है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि आने वाले समय में यह प्रतिमा दुनिया के अजूबे में शामिल हो जाए। यह प्रतिमा सरदार सरोवर नर्मदा बांध हाइवे व हजारों किमी नर्मदा नहर बनाने वाले राठौड़ की देखरेख में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनकर तैयार हुई है। जबकि अमरीका की स्‍टेच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल का वक्त लगा। चीन में बुद्ध की 128 मीटर की प्रतिमा करीब 90 साल में बनी थी।

सिंधु सभ्यता का अदम्य उदाहरण
शिल्पकार राम सुतार का कहना है कि प्रतिमा को सिंधु घाटी सभ्यता की कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबा का इस्तेमाल किया गया है।

पीएम का सपना
पीएम मोदी का सपना रहा है कि सरदार पटेल के नाम से एक ऐसी प्रतिमा बने जो दुनिया भर की सबसे ऊंची प्रतिमा में शुमार हो। इसलिए पीएम मोदी ने इस प्रतिमा का निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले दुनिया भर की ऊंची प्रतिमा को लेकर शोध कराया। शोध के दौरान जब दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमाओं का इतिहास खंगाला तो चीन में बुद्ध की प्रतिमा सबसे ऊंची 128 मीटर की निकली। उसके बाद अमरीका का स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी 90 मीटर है। उसके बाद पीएम मोदी ने नर्मदा नदी के तट में 182 मीटर लंबी प्रतिमा को खड़ा करने का निर्णय लिया। इस काम का जिम्मा सौंपा सरदार सरोवर नर्मदा निगम के अध्यक्ष और गुजरात के हाइवे व कैनालमैन एसएस राठौड़ को। पटेल की प्रतिमा को आकार देने का काम शिल्पकार पद्मश्री राम सुतार और उनके पुत्र अनिल सुतार ने किया है।