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क्या पंजाब में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश तो नहीं है निरंकारी भवन पर हमला?

अमृतसर में निरंकारी भवन पर हुए हमले में तीन लोग मारे गए हैं।

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Nirkari

क्या पंजाब में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश तो नहीं है निरंकारी भवन पर हमला

चंडीगढ़। रविवार दोपहर निरंकारी भवन पर ग्रेनेड से हमला हुआ। इस हमले में तीन लोग घायल हो गए, जबकि 15-20 घायल बताए जा रहे हैं। इस हमले के पीछे कौन है अभी उनका पताया लगाया जा रहा है। लेकिन क्या निरंकारी भवन पर हमला पंजाब में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश तो नहीं है? ये सवाल इसलिए क्योंकि सिख कट्टरपंथियों और निरंकारियों के बीच आपसी तकरार काफी पुराना बताया जाता है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि हमलावर इस बात को जानते हैं कि वह दोनों पक्षों में से किसी एक को उकसा कर पंजाब का माहौल खराब कर सकते हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. ने पंजाब में सक्रिय सिख कट्टरपंथियों के साथ जुड़े लोगों का इस्तेमाल कर इस धमाके को अंजाम दिया है।

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पूरानी है तकरार

पंजाब में कट्टरपंथियों की निरंकारियों के बीच पुराना विवाद है। 1978 में बैसाखी वाले दिन दोनों पक्षों में खूनी टकराव भी हो चुका है। इस दौरान करीब 15 लोगों की मौत भी हो गई थी। दरअसल उस वक्त पंजाब सरकार ने निरंकारिओं को अमृतसर में धार्मिक समारोह करने की अनुमति दी थी। इसका विरोध करने आए दमदमी टकसाल और अन्य सिख संगठनों का निरंकारियों के साथ टकराव हो गया था। 15 लोग मार दिए गए। 13 खालसा सिख और 2 निरंकारी संत। निरंकारी मिशन के 64 भक्त गिरफ्तार किए गए, लेकिन अदालत ने केस खारिज कर सबको छोड़ दिया। इसके बाद सिख कट्टरपंथियों ने निरंकारियों के प्रमुख गुरबचन सिंह को दिल्ली में गोलियों मारी थी। गुरबचन सिंह के कत्ल के आरोप में रणजीत सिंह को 13 साल जेल में भी बिताने पड़े। 1990 में रंजीत सिंह तिहाड़ जेल में था। उसे अकाल तख़्त का जत्थेदार बना दिया गया। यानी अकाल तख़्त का जत्थेदार जेल में बंद एक हत्यारा बन बैठा। गुरुबचन सिंह की मौत के बाद से उनके बेटे हरदेव सिंह निरंकारी समाज की अगुआई करने लगे।


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