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मलयालम अभिनेत्री का सबरीमला पर बोल्‍ड बयान: महिलाओं की पवित्रता यहीं तक सीमित नहीं होती

अभिनेत्री पार्वती थिरुवोथु का कहना है कि शुरुआत से ही महिलाओं को अपवित्र माना जाता रहा है लेकिन मै इसके खिलाफ हूं।

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मलयालम अभिनेत्री का सबरीमला पर बोल्‍ड बयान: महिलाओं की पवित्रता गुप्‍तांग तक सीमित होती है

नई दिल्‍ली। सबरीमला मंदिर में पवित्रता के आधार पर प्रवेश को वर्जित करने के मुद्दे पर एक मलयालम अभिनेत्री पार्वती थिरुवोथु ने मीडिया को एक बड़ा और बोल्‍ड बयान दिया है। उन्‍होंने कहा कि लोग समझते हैं कि महिलाओं की पवित्रता केवल गुप्‍तांग तक ही सीमित होती हैंं। हमेशा से चली आ रही ये सोच संकुचित मानसिकता और अतार्किकता का प्रतीक है। पार्वती का कहना है कि शुरुआत से ही महिलाओं को अपवित्र माना जाता रहा है लेकिन वह इसके खिलाफ हूं।

पुरुष मानसिकता में नहीं आया बदलाव
उन्‍होंने एक मीडियाकर्मी से बातचीत में कहा कि तार्किकता, महिला सशक्तिकरण और महिला समानता को लेकर कागज़ पर आंकड़े कुछ और हैंं जबकि लोगों की मानसिकता इन आंकड़ों से बिल्‍कुल अलग है। समाज में वजाइना के हिसाब से आपकी वरीयता तय की जाती है। मेरे साथ भी ऐसा था। मैं कौन से कपड़े पहनती हूं, मैं अपने माता-पिता से कैसे बात करती हूं, मैं अपने भाई से कैसे बात करती हूं, मैं एक आदमी से कैसे बात करती हूं। ये तमाम चीज़ें समाज में हमेशा देखी जाती रही है। 17 साल की उम्र में जब मैं मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में आई तभी से मुझे लगने लगा कि कागज पर कुछ और है और दिखाने के लिए कुछ और।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही
आज तक मैंने मलयालम अभिनेत्री होने के बावजूद सबरीमला के मुद्दे पर कभी कोई बात नहीं की। लेकिन मैंने पूरे जीवन इस मुद्दे पर सोचा है। मैं मासिक धर्म और अपवित्रता के हमेशा खिलाफ रही हूं। इसलिए मैंने मंदिरों में जाना बंद कर दिया। मुझे पता है कि लोग मेरी आलोचना करेंगे। लेकिन मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हूं।

धर्म की बात पर महिलाओं को समझाना मुश्किल
उन्‍होंने कहा कि जब आप वास्तव में धर्म की बात करते हैं तो आप उन महिलाओं को नहीं समझा सकते हैं जो इसका विरोध कर रही हैं। लोग समझते हैं कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं। महिलाओं की पवित्रता को लोग वर्जिनिटी से जोड़ कर देखते हैं। इसे दूर करने की जरूरत है और इसके लिए मुझे नहीं पता कि कितने साल या पीढ़ी लग जाएंगे।