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Supreme Court का बड़ा फैसला, सरकारी नौकरियों व शैक्षिक संस्थानों में 2020-21 सत्र के लिए मराठा आरक्षण पर रोक

HIGHLIGHTS सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण के मामले पर सुनवाई करते हुए सरकारी नौकरियों व शैक्षिक संस्थानों में 2020-21 सत्र के लिए आरक्षण पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट तीन जजों की बेंच ने अपने अंतरिम आदेश के बाद इस मामले को विचार के लिए बड़ी बेंच में भेज दिया है।

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maratha reservation

Supreme Court ban on Maratha reservation in government jobs and educational institutions for the session 2020-21

नई दिल्ली। आरक्षण ( Reservation ) को लेकर हमेशा से सियासत और विवाद होता रहा है। अब एक बार फिर से आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासत देखने को मिल सकता है। दरअसल, देश की सर्वोच्च अदालत ने मराठा आरक्षण को लेकर बुधवार को एक बड़ा फैसला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण के मामले पर सुनवाई करते हुए सरकारी नौकरियों व शैक्षिक संस्थानों में 2020-21 सत्र के लिए आरक्षण पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट तीन जजों की बेंच ने अपने अंतरिम आदेश के बाद इस मामले को विचार के लिए बड़ी बेंच में भेज दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एल.एन राव के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा कि इस फैसले से अब तक इस कोटे का लाभ ले चुके लोगों के स्टेटस पर कोई असर नहीं होगा।

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सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बुधवार को कहा कि PG दाखिलों को छेड़ा नहीं जाएगा। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि मामले के लिए बड़ी बेंच का गठन करेंगे जो कि मराठा आरक्षण की वैधता पर विचार करेगी।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश को दी गई है चुनौती

आपको बता दें कि मराठा आरक्षण ( Maratha Reservation ) को लेकर बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका में कहा गया कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग ( SEBC ) अधिनियम 2018, जो शिक्षा और नौकरियों में मराठा समुदाय को 12 फीसदी और 13 फीसदी कोटा प्रदान करता है। हाईकोर्ट का यह आदेश इंदिरा साहनी मामले में निर्धारित सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय कर दी है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की एक पीठ ने पिछले साल 27 जून को अपने फैसने में अधिनियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर महाराष्ट्र राज्य को 16 प्रतिशत आरक्षण को घटाकर 12-13 फीसदी करने का निर्देश दिया।

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बता दें कि महाराष्ट्र में 2018 में तत्कालीन भाजपा सरकार के नेतृत्व में सामाजिक एवं शैक्षिणिक पिछड़ा वर्ग ऐक्ट को मंजूरी दी गई थी। इस कानून के तहत मराठा समुदाय को पिछड़े वर्ग में शामिल करते हुए ओबीसी रिजर्वेशन का फैसला लिया गया था।