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सुप्रीम कोर्ट: बहुत हो गया, अब लोकपाल जल्‍द नियुक्‍त करे केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल के मुद्दे पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार से जल्‍द लोकपाल नियुक्‍त करने को कहा।

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Supreme court

नई दिल्‍ली। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को लोकपाल के मुद्दे पर एटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल के माध्‍यम से सरकार का पक्ष जानने के बाद कहा कि इस मामले में पहले ही बहुत देर हो चुका है। केंद्र सरकार इस मामले में तत्‍परता दिखाते हुए जल्‍द से जल्‍द लोकपाल की नियुक्‍त करे। इससे पहले एटार्नी जनरल ने शीर्ष अदालत को बताया कि केंद्र सरकार की पहल पर 10 अप्रैल को लोकपाल मसले पर चयन समिति की बैठक हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।

अगली सुनवाई 15 मई को
केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि लोकपाल की नियुक्ति के लिए चयन समिति में प्रतिष्ठित न्यायविद् को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है। पीठ ने कहा कि उसे इस चरण में कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है। हमें उम्‍मीद है कि लोकपाल को नियुक्त करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाएगी। पीठ ने मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 15 मई तय की है। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव को समिति में प्रतिष्ठित न्यायविद् के पद पर नियुक्ति दी गई थी लेकिन पिछले वर्ष उनके निधन के बाद से यह पद रिक्त पड़ा है। इस बीच कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल चयन समिति की बैठक में शामिल होने से किया इनकार कर दिया था। आज इस बात को लेकर गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की ओर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

शीर्ष अदालत के आदेशों की अवमानना
कॉमन कॉज की तरफ से कहा गया कि शीर्ष अदालत के पिछले वर्ष 27 अप्रैल के आदेश के बावजूद लोकपाल की नियुक्ति नहीं की जा रही है। केंद्र सरकार को अदालत के आदेशों की परवाह नहीं है। यह अदालती आदेशों की अवहेलना है। शीर्ष अदालत ने अपने पिछले वर्ष के फैसले में कहा था कि प्रस्तावित संशोधनों को संसद से मंजूरी मिलने तक लोकपाल अधिनियम को लागू करने से रोकने के पीछे कोई तर्क नहीं है। इन प्रस्तावों में लोकसभा में विपक्ष के नेता का मुद्दा भी शामिल है।

2013 में पास हुआ था लोकपाल बिल
आपको बता दें कि लोकपाल और लोकायुक्त कानून साल 2013 में लोकसभा व राज्यसभा की सहमति से पास हुआ था। चुने हुए लोकपाल को देश के शीर्ष अधिकारियों समेत पीएम और केंद्रीय मंत्रिमंडल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का अधिकार होगा।