
नई दिल्ली। ताजमहल एक ऐसी इमारत, एक ऐसा अजूबा जिसकी पहचान न सिर्फ इंडिया में है बल्कि पूरे वर्ल्ड भारत की शान बढ़ाने के लिए ताजमहल का नाम आता है। ताजमहल की खूबसूरती को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल को देखने दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। लेकिन हाल ही में ताजमहल को लेकर हुए विवाद में ताजमहल की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में ताजमहल को शिव मंदिर यानि 'तेजो महालय' का नाम दे दिया गया।
पिछले महीने यूपी सरकार ने सितंबर में ताजमहल को यूपी टूरिज़्म बुकलेट से हटवा दिया था, वहीं बीजेपी लीडर विनय कटियार ने ताजमहल को 'तेजो महालय' बताकर एक नए विवाद को जन्म दिया था। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि ये तेजो महालय का कॉन्सेप्ट आखिर आया कहां से है? दरअसल तेजो महालय को सबसे पहले 60 और 70 के दशक में मराठी मैगज़ीन्स में इस्तेमाल किया गया था। पीएम ओएक नाम के एक विवादास्पद मराठी लेखक ने इस टर्म को सबसे पहले इस्तेमाल किया था। अपने इस आर्टिकल में ओएक ने ताजमहल को भगवान शिव की श्राइन यानि तेजो महालय बताया था। ओएक ने किताब में कहा था कि अगर ताज महल की खुदाई की जाए, तो इसमें से प्राचीन मंदिर के अवशेष को देखा जा सकता है। हालांकि उस समय इस बात को गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन ओएक ने फिर भी लिखना जारी रखा. ओएक ने अपनी लेखनी से कई प्रोपैगेंडा और थ्योरीज़ को किताब की शक्ल दी।
पीएम ओएक ने सिर्फ ताजमहल को ही नहीं बल्कि कई ऐतिहासिक स्मारकों पर भी सवाल उठाए हैं। जैसे उन्होंने सउदी अरब में स्थित काबा को भी हिंदू मंदिर घोषित कर दिया था। इसके अलावा उन्होंने आगरा किले को भी एक हिंदू स्मारक बताया था। ओएक का ये भी दावा था कि ईसाई धर्म दरअसल एक वैदिक धर्म है। उनके मुताबिक ईसाई धर्म यानि क्रिश्चियनिटी का वास्तविक नाम 'कृष्ण नीति' था।
यही नहीं एक पीएम ओएक ने यह भी दावा किया कि वैटिकन का वास्तविक नाम 'वाटिका' था और पोप का पद दरअसल एक वेदिक पुरोहित पद था। इस्लाम और ईसाई धर्म की कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाओं को हिंदू धर्म से जोड़ने वाले इस विवादास्पद लेखक ने अब तक नौ किताबें इंग्लिश में, 13 किताबें मराठी में और 8 किताबें हिंदी में लिखी हैं। हालांकि इस बात की आज तक पुष्टि नहीं हुई है। यह राइटर पीए ओएक के अपने खुद के विचार हैं।
Published on:
26 Oct 2017 01:32 pm
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