
गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम अस्पताल में पिछले 24 घंटों में 10 बच्चों की मौत हो गई । घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। बारपेटा जिला स्थित फखरद्दीन अली अहमद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक दिन के भीतर अभी तक 10 बच्चे दम तोड़ चुके हैं। गुरुवार को 4 बच्चों की मौत हुई जबकि बुधवार शाम 7 बजे से रात 11 बजे के बीच 6 बच्चों ने दम तोड़ा। राज्य की मेडिकल सेवाओं पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
26 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा
सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में फैली लापरवाही और पर्याप्त मात्रा में मेडिकल अस्पताल में सुविधा नहीं होने के चलते बच्चों की मौत हुई । सूत्रों की माने तो पिछले कुछ महीनों में 26 डॉक्टर अस्पताल से इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि ये मौतें जन्म के समय की जटिलताओं की वजह से हुई हैं। गौरतलब है कि सभी नवजात दो से चार दिन के थे और सरकारी अस्पताल के बाल चिकित्सा विभाग के आईसीयू में उनका इलाज चल रहा था। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. बी गोस्वामी के अनुसार, नवजातों को सभी चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की गयी थीं, लेकिन जन्म संबंधी जटिलताओं के कारण उनकी मौत हो गयी। हेमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि सभी नवजातों को नवजात देखरेख यूनिट में रखा गया था और उनकी समुचित देखरेख की जा रही थी। नवजातों की स्थिति गम्भीर थी, जिसके बाद उनकी मौत हुई। दो माताओं की एज 20 साल से कम थी। बारपेटा जिले में नवजातों की मृत्यु दर पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष कम रही है।
डॉक्टर ने नहीं दिया इस्तीफा
स्वास्थ्य मंत्री शर्मा ने कहा कि दो महीने पहले ही चाइल्ड केयर यूनिट खोला गया है। इसमें समुचित व्यवस्था की गई है और जहां तक मेरी जानकारी में अभी तक इस विभाग के एक भी डॉक्टर ने इस्तीफा नहीं दिया है। शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक कारणों से बच्चों की मौत हुई है। इधर बरपेटा डिप्टी कमिश्नर थानेस्वर मालाकर ने कहा कि नेशनल रुरल हेल्थ मिशन के अधिकारी और जिला प्रशासनिक अधिकारी ने अस्पातल पहुंचकर जायाजा लिया है। और स्थिति दुरस्त करने के निर्देश दिए।
40 सालों से नहीं बना एक भी अस्पताल
गौरतलब है कि असम से स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की काफी कमी है। 40 सालों में एक भी मेडिकल अस्पताल नहीं खोले गए हैं। वर्तमान में राज्य में तीन मेडिकल कॉलेज हैं। गुवाहाटी डिबरुगढ़ और सिल्चर में है। 2009 में कांग्रेस के शासन काल में जोरहट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल की शुरुआत हुई। उसके बाद तेजपुर और बरपेटा में दो और मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोले गए। हालांकि लोगों का आरोप है कि अस्पतालों में डॉक्टर और सुविधाओं की घोर कमी है।
Published on:
05 Oct 2017 09:38 pm
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