Highlights.- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 1 मार्च यानी सोमवार को कोरोना वैक्सीन लगवाई - दूसरे चरण में जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, 60 साल से अधिक उम्र के लोग ही वैक्सीन लगवा सकेंगे- कर्नाटक के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने घर पर टीका लगवाया और जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर दी
नई दिल्ली।
कोरोना वैक्सिनेशन का दूसरा चरण 1 मार्च से शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 1 मार्च यानी सोमवार को कोरोना वैक्सीन लगवाई। अब भी कई प्रमुख नेताओं और मंत्रियों की ओर से यह सिलसिला जारी है। हालांकि, इस बार दूसरे चरण को लेकर जो गाइडलाइंस जारी की गई हैं, उसके मुताबिक, 60 साल से अधिक उम्र के लोग ही इस चरण में वैक्सीन लगवा सकेंगे। इसके अलावा, 45 साल से अधिक उम्र के वे लोग भी वैक्सीन लगवा सकेंगे, जो किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं।
सरकार ने फिलहाल 20 बीमारियों को गंभीर श्रेणी में रखा है। इसके अलावा, वैक्सीन लगवाने के लिए जब संबंधित व्यक्ति टीकाकरण केंद्र पर पहुंचे, तो बीमारी से संबंधित प्रमाण पत्र ले जाना उसे अनिवार्य होगा।
यह तो थी वैक्सिनेशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी, मगर असल खबर यह नही है। खबर यह है कि कर्नाटक के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने भी मंगलवार को बेंगलुरु में कोरोना वैक्सिनेशन कराया। मंत्री जी ने टीका लगवाने के बाद खुशी-खुशी इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की, मगर उन्हें क्या पता था कि यह जानकारी शेयर करना, उनके लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।
दरअसल, कर्नाटक के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने मंगलवार को कोरोना वैक्सीन तो लगवाई, मगर यह अपने घर पर लगवाई। यही जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर भी शेयर कर दी। फिर क्या था, जनता ने मंत्री जी को ट्रोल करना शुरू कर दिया। यही नहीं, 64 साल के पाटिल की इस कृत्य की आलोचना उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने भी की है। वहीं, कर्नाटक सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के. सुधाकर समेत कई और मंत्रियों व प्रमुख नेताओं ने पाटिल के इस कदम की आलोचना की है।
जब मीडियाकर्मियों ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से इस बारे में सवाल पूछा तो हिचकिचाते हुए उन्होंने कहा वैक्सीन लेना बेहद जरूरी है। टीकाकरण की जगह कहीं भी हो सकती है। यही नहीं, कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने भी कहा कि उन्होंने घर पर कोरोना का टीका लगवाकर कोई अपराध नहीं किया है।