Tractor Rally: बेकाबू किसान, बेबस पुलिस दिल्ली समेत इन राज्यों में छिड़ा संग्राम, जानिए मार्च से जुड़ी बड़ी बातें

  • नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों का सबसे बड़ा मार्च
  • विरोध के बावजूद लाल किले पर की किसानों ने चढ़ाई
  • कहीं टूटे बैरिकेड्स तो कहीं किसानों पर बरसीं लाठियां, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

नई दिल्ली। नए कृषि कानून ( Farmer Protest ) के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन का 62वां दिन सबसे बड़ा दिन साबित हुआ। इस दिन किसानों का गुस्सा अपने चरम पर दिखा। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली ( Tractor Rally )के जरिए अपने इरादों से सरकार को रूबरू करा दिया।

सुबह से ही किसानों का प्रदर्शन थोड़ा उग्र नजर आया। हालांति देर रात में उन्होंने दिल्ली में घुसने के लिए कुछ बैरिकेड्स तोड़ दिए थे, लेकिन सुबह के बाद ये कदम सिर्फ बढ़ते गए इन्हें ना तो पुलिस रोक पाई और ना ही किसी नेता की नसीहत।

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दिल्ली पुलिस को जिसकी आशंका थी वही बवाल शुरू हो गया। किसान ट्रैक्टर रैली से पहले किसान नेताओं के शांतिपूर्ण रैली के बड़े-बडे़ दावे उनके अपने किसानों ने ही दिल्ली की सड़कों पर पहुंचते ही, ट्रैक्टर के पहियों के नीचे कुचल कर रौंद डाले। बेकाबू किसान आगे बढ़ते गए और बेबस पुलिस अपने इंतजामों के साथ धरी की धरी रह गई। आईए जानते हैं अब तक का घटनाक्रम...

ऐसे शुरू हुआ राजधानी में किसानों का दखल
- राष्ट्रीय राजधानी से लगे सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के कुछ समूह सुबह पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर दिल्ली में दाखिल हो गए। काफी समय तक मुकरबा चौके पर बैठे, लेकिन फिर उन्होंने वहां लगाए गए बैरिकेड और सीमेंट के अवरोधक तोड़ने की कोशिश की।

- किसानों के बढ़ते कदमों की आहट पुलिस ने पहचान ली और उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। लेकिन किसान इतने से कहां रुकने वाले थे। लिहाजा ये इंतजाम भी धरा रह गया।

- सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के कुछ समूह दिल्ली पुलिस द्वारा ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित किए गए समय से पहले अवरोधकों को तोड़कर दिल्ली में दाखिल हो गए।

इसलिए किसानों ने बदला समय
किसान नेता कक्काजी ने बोले- पुलिस को हमें तय रास्ते पर जाने देना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने हमें रोके रखा। जब प्रशासन अपनी बात पर अडिग नहीं रही, तो किसानों को भी थोड़ा रास्ता बदलना पड़ा।

हुई फूलों की बारिश
जैसे-जैसे किसान दिल्ली की सीमा में घुस रहे थे वैसे-वैसे जनता उनका स्वागत फूलों की बरसा कर रही थी। 10.30 बजे किसानों का एक जत्था संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा. यहां एक ओर जहां स्थानीय लोगों ने फूलों की बौछार कर इनका स्वागत किया।

- करीब 12.30 बजे दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर के पास जब किसानों ने जबरन घुसने की कोशिश की, तब पुलिस की ओर से ट्रैक्टरों पर आंसू गैस के गोले दागे गए ताकि किसानों को रोका जा सके।

- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर भी करीब 12.45 बजे किसान ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली की सीमा में घुसने की कोशिश करते रहे। इस प्रदर्शन में निहंग भी शामिल थे। जो तलवार हाथों में लिए पुलिस से भिड़ गए।

लहराए झंडे
किसानों की ट्रैक्टर रैली में अलग-अलग रंग दिख रहे हैं. कोई अपने संगठनों के झंडे थामे हुए है तो कोई तिरंगा लहराता दिखाई दिया।

अक्षरधार पर भी तीखी बहस और तोड़फोड़
एक ओर पुलिस किसानों को दिल्ली ना आने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है तो दूसरी ओर किसान लगातार दिल्ली में आने की अपील कर रहे थे। दिल्ली के अक्षरधाम के पास जब किसान ट्रैक्टर परेड निकाल रहे थे, तब कुछ ऐसा नजारा दिखा

बिना इजाजत लाल किले पर किसानों की चढ़ाई
किसानों ने पहले ऐलान किया था कि वो लालकिले तक परेड निकालना चाहते हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी, बावजूद इसके किसानों ने हंगामा और हिंसा करते हुए लाल किले पर चढ़ाई कर दी। तमाम कोशिशों के बावजूद दिल्ली पुलिस किसानों को लालकिले तक ट्रैक्टर लाने में नहीं रोक पाई।

दिल्ली के नांगलोई के पास किसानों को रोकने के लिए जो बैरिकेड लगाए गए थे, उन्हें भी तोड़ दिया गया है। यहां से भी किसान लाल किले तक पहुंचने की कोशिश में हैं।

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डीडीयू मार्ग पर एक व्यक्ति की मौत
दिल्ली के डीडीयू मार्ग पर एक व्यक्ति की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक, यहां पर एक ट्रैक्टर पलट गया जिसके बाद ट्रैक्टर चालक की मौत हो गई है। आईटीओ के पास पूरे चौक पर सैकड़ों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर यहां खड़े रहे। डीटीसी की एक बस को भी नुकसान पहुंचाया गया।

इन राज्यों में भी छिड़ा घमासान
राजस्थान में सुबह 11 बजे से किसानों ने दिल्ली की ओर कूच करने शुरू किया। इस दौरान पहला ट्रैक्टर आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों के नाम पर निकाला गया।

हालांकि जयपु-दिल्ली हाईवे पर हरियाणा पुलिस ने कड़ा बंदोबस्त किया है और यहां एक-एक ट्रैक्टर को ही आगे जाने दिया जा रहा है।

हरियाणाः यहां से निकल रहे ट्रैक्टरों पर किसी भी संगठन ने अपने झंडे को तिरंगे से ऊपर नहीं लगाया। यहां से ट्रैक्टरों के साथ-साथ बाइक और कार सवार भी दिल्ली कूच करने के लिए शामिल हुए। यहां दिल्ली से सटे फरीदाबाद में किसान और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई। यहां पुलिस ने विरोध कर रहे किसानों पर लाठियां भांजी और करीब 12 लोगों को हिरासत में लिया।

यूपी में बवालः राजधानी लखनऊ में किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला। यहां भी पुलिस और किसानों के बीच जमकर झड़प हुई। किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

इसी तरह दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी किसानों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। पुलिस के आंसू गोलों के जवाब में किसानों ने उनकी गाड़ियों पर पत्थरबाजी कर डाली।

इसी तरह पंजाब के जालंधर में लोगों ने किसानों का समर्थन किया। भारतीय किसान यूनियन राजेवाल की अगुवाई में वाल्मीकि संगठनों के अलावा दूसरे धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शहर में रैली निकाली।

वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। यहां वामपंथी दलों से जुड़े कुछ किसान संगठन ट्रैक्टर मार्च निकाला। हालांकि किसानों की बड़ी संख्या नजर नहीं आई और किसी तरह का कोई प्रदर्शन भी नहीं था।

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धीरज शर्मा
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