
मद्रास HC ने तूतीकोरिन प्लांट के विस्तार पर रोक लगाई, रजनीकांत ने की शांति की अपील
नई दिल्ली। तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर प्लांट को लेकर हुई हिंसा में अबतक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले में जमकर राजनीति भी हो रही है। इसी बीच वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का मामले पर पहला बयान आया है। घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अग्रवाल ने कहा जो कुछ भी हुआ है उससे हम दुखी हैं। प्लांट में काम अभी बंद है। हम इसे दुबारा शुरू करना तो चाहते हैं लेकिन सरकार और कोर्ट के इजाजत की प्रतिक्षा कर रहे हैं। अबतक हम कोर्ट और सरकार के हर नियम का पालन करते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तूतीकोरिन मामला
तूतीकोरिन में स्टरलाइट विरोधी रैली में प्रदर्शनकारियों के पुलिस की गोलियों से मारे जाने के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)से कराने के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जी.एस.मणि ने तूतीकोरिन के जिला अधिकारी,पुलिस अधीक्षक और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धारा 302 (हत्या) का मामला दर्ज करने की भी मांग की है।
मृतक के परिजनों को मिले 50 लाख का मुआवजा
याचिका में कहा गया है कि गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये की अनुग्रह राषि की घोषणा मात्र जनता को खुश करने और नरसंहार के अपराध से बचने के लिए की गई है। उन्होंने याचिका में गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 50 लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के लिए 25 लाख रुपये की राशि की मांग की गई है। याचिका में घटना के बाद तूतीकोरिन,तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी में बंद की गई इंटरनेट सेवा बहाल करने की भी मांग की गई है।
तूतीकोरिन हिंसा की हो सीबीआई जांच
अधिवक्ता मणि ने आरोप लगाया कि यह एक योजनाबद्ध तरीके से जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा अन्य उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारियों की सहायता से किया गया नरसंहार है। याचिका में मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा गया है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता होने के कारण पुलिस इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करने में सक्षम नहीं है।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने चलाई थी गोलियां
तूतीकोरिन में विरोध प्रदर्शन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया था जब वेदांता समूह के स्टरलाइट तांबा संयंत्र को बंद करने की मांग करने वाले सैंकड़ों लोगों पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी। ग्रामीणों का कहना था कि यह प्रदूषण फैलाने के अलावा कृषि भूमि को नष्ट कर रहा है और इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को खराब कर रहा है। सैकड़ों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
Published on:
25 May 2018 10:31 am
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