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ओडिशा: झारसुगुडा एयरपोर्ट स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साय के नाम से जाना जाएगा, मिली मंजूरी

झारसुगुडा हवाई अड्डा अब स्वाधीनता संग्राम सेनानी 'वीर सुरेंद्र साय एयरपोर्ट' के नाम से जाना जाएगा। कैबिनेट ने नाम बदलने को लेकर मंजूरी दे दी है।

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ओडिशा: झारसुगुडा एयरपोर्ट स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साय के नाम से जाना जाएगा, मिली मंजूरी

नई दिल्ली। गुरुवार को आखिरकार ओडिशा सरकार की लंबे वक्त से 'अटकी मुराद' पूरी हो गई है। ओडिशा के झारसुगुडा हवाई अड्डे का नाम बदल दिया गया है। अब जल्द ही ये एयरपोर्ट स्वाधीनता संग्राम सेनानी 'वीर सुरेंद्र साय एयरपोर्ट' के नाम से जाना जाएगा। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में एयरपोर्ट का नाम बदलने पर फैसला लिया गया। बता दें कि मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र को पत्र लिखकर एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग को फिर से दोहराया था। साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से हवाई अड्डे पर UDAN ( उड़े देश का आम नागरिक ) सेवाओं की बहाली का अनुरोध किया। जिससे झारसुगुडा से अन्य राज्यों में उड़ान संचालन के और अवसर मिल सकें। उड़ीसा से सांसद और केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने एयरपोर्ट का नाम बदलने के केंद्र के फैसला का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

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बता दें कि वीर सुरेंद्र साय ओडिशा के एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। काफी वक्त से झारसुगुडा हवाई अड्डे का नाम बदलने की मांग उठ रही थी। जो संबंधित क्षेत्र के स्थानीय जनता की भावनाओं को दर्शाता है। वैसे यह राज्य से जुड़े सम्मानित व्यक्तित्व के योगदान के लिए एक उचित श्रद्धांजलि भी है।

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कौन थे वीर सुरेंद्र साय?
भारत के अमर स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साय का जन्म जनवरी सन 1809 में हुआ था। वीर सुरेंद्र साय ने देश के लिए 18 साल की उम्र में ब्रिटिश सरकार और उनके अधिकारियों के खिलाफ हथियार उठा लिए थे। उन्होंने ओडिशा के संबलपुर में आदिवासियों के अधिकारों के लिए भी लंबी लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपनी जिंदगी के चालीस साल जेल में गुजारे। उन्हें 'ओडिशा का वीर' भी कहा जाता है। कई बार ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पकड़ा भी। लेकिन उनका संघर्ष जारी रहा। वीर सुरेंद्र साय ने 28 फरवरी, 1884 को असीरगढ़ किले की जेल में अन्तिम सांस ली।


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