उन्नाव रेप केस: पीडि़ता के चाचा महेश को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश

उन्नाव रेप केस: पीडि़ता के चाचा महेश को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश

  • Unnao Rape Case: तीस हजारी कोर्ट ट्रांसफर, जिला जज धर्मेश शर्मा करेंगे सभी 5 मामलों की सुनवाई
  • ट्रक ड्राइवर और मालिक को लेकर कोर्ट पहुंची लखनऊ पुलिस
  • डीजे धर्मेश शर्मा को कोर्ट ट्रायल को मिलेे 45 दिन

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित उन्‍नाव रेप केस मामले में सख्‍ती दिखाते हुए इसे दिल्‍ली की तीस हजारी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया है। अब इस मामले से जुड़े 5 केस की सुनवाई जिला जज धर्मेश शर्मा करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में लिखित आदेश जारी किया गया है। तीस हजारी कोर्ट को 45 दिन में ट्रायल पूरा करना करने को कहा गया है।

Tis hazari Court

मामले की होगी नियमित सुनवाई

उन्‍नाव रेप केस की तीस हजारी कोर्ट में दिन प्रतिदिन (डे टू डे हेयरिंग) सुनवाई होगी। इसके अलावा पीड़िता को एम्स में भर्ती करने को लेकर परिवार की राय मांगी गई थी।

अभी तक की जानकारी के मुता‍बिक पीड़िता और वकील का इलाज फिलहाल लखनऊ में ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है। पीड़िता का इलाज कर रहे डॉक्‍टर ने बताया है कि अब दोनों की हालत में सुधार है। हमारे इलाज से पीड़ित परिवार पूरी तरह संतुष्‍ट है।

दूसरी तरफ शीर्ष अदालत ने उन्नाव रेप केस पीड़िता के चाचा महेश को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया गया है।
इस मामले में आरोपी ट्रक ड्राइवर और मालिक को लेकर लखनऊ पुलिस कोर्ट पहुंच गई है।

उन्नाव रेप केस: पीडि़ता के चाचा महेश को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश

अगल बेंच करेगी पत्र मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह पता लगाने के लिए जांच का आदेश दिया कि क्या रजिस्ट्री के अधिकारियों की लापरवाही के कारण मुख्य न्यायाधीश को उन्नाव पीड़िता के परिजनों का पत्र प्राप्त नहीं हो सका। इस मामले की जांच कोर्ट की अलग बेंच करेगी।

बता दें कि उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के परिवार ने जान का खतरा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को एक पत्र लिखा था, जो सीजेआई को समय पर नहीं मिला।

अब इसके संबंध में जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा नामित न्यायाधीश की देखरेख में अदालत के महासचिव इसकी जांच करेंगे।

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मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ को रजिस्ट्री ने बताया कि प्रति माह विभाग को पांच हजार आवेदन आते हैं। इस कारण मुख्य पत्रों और आवेदनों की छंटनी में समय लगता है।

महासचिव ने पीठ को बताया कि जुलाई महीने में विभाग को छह हजार के करीब आवेदन प्राप्त हुए । इस मामले में 1998 से एक स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाई गई है। इस कारण पीड़िता के नाम की जानकारी रजिस्ट्री को नहीं थी।

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