अमरीका ने फाइजर वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी, भारत और ब्रिटेन में कोविशील्ड क्रिसमस के बाद

  • एफडीए पैनल की मंजूरी के बाद अमरीका में फाइजर का रास्ता खुला।
  • ऑस्ट्रेलिया में कोविड वैक्सीन से एचआईवी पॉजिटिव रिपोर्ट सामने आई।
  • सरकार ने कोविड वैक्सीन की इस्तेमाल पर रोक लगाई।

नई दिल्ली। अमरीका में फाइजर की वैक्सीन की आपातकालीन उपयोग की मंजूरी का रास्ता लगभग साफ हो गया है। एफडीए पैनल ने फाइजर वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड को भी ब्रिटेन में क्रिसमस तक उपयोग की मंजूरी मिल सकती है। दरअसल, सीरम इंस्टीट्यूट ने अपनी आपात मंजूरी के आवेदन में ब्रिटेन के आंकड़ों का जिक्र किया था। ऐसे में ब्रिटेन की मंजूरी महत्वपूर्ण रहेगी। दूसरी ओर आस्ट्रेलिया में चौंकाने वाली बात सामने आई है। वहां पर निर्मित कोविड वैक्सीन से लोगों की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद सरकार ने वैक्सीन की पूरी योजना को रद्द करने के निर्देश दिए हैं।

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अमरीका में फाइजर और मॉडर्ना ने आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मांगी थी, जिसमें फाइजर को लेकर अमरीका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने अपनी सहमति दे दी है। समिति के सदस्य पॉल ऑफिट ने कहा कि टीके से स्पष्ट फायदा नजर आ रहा है। लेकिन इसके अनुमानित खतरे हैं। उन्होंने कहा कि टीका की लाभ पहुंचाने की क्षमता उसके खतरों को कम करती है। उधर, कोविशील्ड को भी ब्रिटेन में जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद की जा रही है। माना जा रहा है कि क्रिसमस तक वैक्सीन को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। अगर ब्रिटेन में वैक्सीन को जल्द मंजूरी मिलती है तो उसका फायदा उसे भारत में भी मिलेगा। ब्रिटेन की मंजूरी के आधार पर यहां भी जल्द मंजूरी दी जा सकती है।

ऑस्स्ट्रेलिया ने बंद किया क्लीनिकल ट्रायल

ऑस्ट्रेलिया में क्वीसलैंड यूनिवर्सिटी और बायोटेक फर्म सीएसएल की विकसित वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल को रोक दिया गया है। वैक्सीन के ट्रायल में शामिल प्रतिभागियों के एचआइवी टेस्ट रिजल्ट को पॉजिटिव पाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। ऑस्ट्रेलिया ने इस वैक्सीन के 51 मिलियन डोज बुक किए हुए थे। जिनकी कीमत करीब 750 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर थी। डेवलपर्स ने जानकारी दी कि ट्रायल में शामिल कुछ प्रतिभागियों में एचआईवी के लक्षण दिखने लगे जबकि उनके ब्लड सैंपल में इसके वायरस नहीं पाए गए। वैक्सीन के साथ जो परेशानी पैदा हुईए वह एचआईवी में पाए जाने वाले एक प्रोटीन के दो टुकड़ों के उपयोग से संबंधित थी। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीशन ने कहा कि हमें इससे झटका लगा है। लेकिन हम इन डोज की भरपाई दूसरी कंपनियों से करने की कोशिश करेंगे।

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