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वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज ने 100 में 99 MBBS की सीटे खाली छोडऩे का किया फैसला

तमिलनाडु स्थित वेल्लोर के प्रमुख क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज ने इस साल 99 में से 100 एमबीबीएस सीटें रिक्त करने का फैसला किया है।

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Mohit sharma

Sep 07, 2017

CMC

नई दिल्ली। तमिलनाडु स्थित वेल्लोर के प्रमुख क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज ने इस साल 99 में से 100 एमबीबीएस सीटें रिक्त करने का फैसला किया है। शताब्दियों पुरानी यह अल्पसंख्यक संस्था अपने स्वयं विवेक के माध्यम से एनईईटी योग्य छात्रों का चयन करने के अधिकारों की मांग कर रही है। बता दें कि वर्तमान में केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा स्थापित समितियां केंद्रीय चयन के माध्यम से छात्रों को चुनती हैं।

कम वेतन में 2 साल सेवा देते हैं डॉक्टर्स

हालांकि, महाविद्यालय ने केन्द्र द्वारा एमबीबीएस के लिए नामित सिर्फ एक छात्र (सैनिक के पुत्र) के आवेदन को स्वीकार किया है। कॉलेज का कहना है कि पूरे देश में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में 180 मिशन अस्पताल हैं, जहां पढ़ाई पूरी होने पर डॉक्टरों को कम वेतन के लिए दो साल की सेवा की आवश्यकता होती है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अन्ना पुलिमुड ने कहा कि हम देश भर से ऐसे छात्रों को चुनते हैं, जिनमें असाधारण सामाजिक चिंतन और समाज के लिए काम करने का जज्बा हो। उन्होंने बताया कि हमने ऐसे छात्रों का चुनाव किया है, जो गरीब और दूर दराज क्षेत्रों की पृष्ठभूमि से वास्ता रखते हैं। शिक्षा के बाद ये छात्र वापस उन्हीं क्षेत्रों में जाकर अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल उच्च अंक ही समाज सेवा कार्यों की गारंटी नहीं देता। उन्होंने कहा कि हमें यह अधिकार है कि हम अपनी आवश्यक्ताओं पर खरे उतरने वाले कैंडिेट्स के चुनाव का अधिकार रखते हैं।

अदालत का फैसला तय करेगा रुख

डॉक्टर्स एसोसिएशन फॉर सोशल इक्वलिटी के महासचिव डॉ. जीआर रबीन्द्रनाथ का कहना है कि एक विकासशील देश के रूप में, हमें अधिक अंडर ग्रेजुएट (यूजी) डॉक्टरों और सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों की भी जरूरत है। इस तरह से इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश को रोकना भारत की स्वास्थ्य देखभाल वितरण प्रणाली के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेज से छूट दी और उसने अपने स्वयं विवेक के माध्यम से छात्रों को भर्ती कराया। एक अधिकारी के अनुसार अक्टूबर में शीर्ष अदालत की ओर से फैसला आने की संभावना है। यदि अदालत अनुमति देती है तो शेष सीटें भरी जाएंगी। प्रिंसिपल ने कहापूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार ऐसा कहा है कि हमारे प्रवेश प्रणाली निष्पक्ष, पारदर्शी और गैर-शोषण करने योग्य है।।