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वियतनाम के राष्‍ट्रपति और PM मोदी में मुलाकात: तीन समझौतों पर किए हस्ताक्षर

दोनों नेताओं ने रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की।

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वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। आज उन्होंने PM नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों में परमाणु सहयोग समेत तीन समझौते हुए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। इसके अलावा दोनों शीर्ष नेताओं में रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में क्वांग को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

क्वांग ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी मुलाकात की और उनसे द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के तरीकों पर बातचीत की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार- राष्ट्रपति क्वांग वियतनाम-भारत बिजनेस फोरम में भी शिरकत करेंगे।

बता दें कि वियतनाम दक्षिणपूर्व एशिया देशों में महत्वपूर्ण साझीदार है। भारत और वियतनाम का 2016-17 में व्यापार 6.24 अरब डॉलर रहा। सन 2020 तक इसे 15 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति बनी है।

कैसे हैं दोनों देशों के सबंध
शिया प्रशांत क्षेत्र में स्थित वियतनाम भारत का एक घनिष्ट मित्र राष्ट्र है। चीनी अकादमी ऑफ सोशल साइंस के विशेषज्ञ शू लिपिंग का मानना है कि भारत और वियतनाम दोनों देश अपने दोतरफा संबंधों में एक सफल मुकाम चाहते हैं। जानकारी के अनुसार- भारत और वियतनाम के बीच दोस्ती का सिलसिला लगभग 2 ईपू. में तब शुरू हुआ था, जब भारतीय व्यापारी, भारत चीन के क्षेत्रों के लिए रवाना हुए। इस लेनदेन से विशेष रूप से मध्य और दक्षिण वियतनाम के क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति का प्रसार हुआ। भारतीय प्रभाव वियतनामी लोकगीत, कला और दर्शन में आज भी मौजूद हैं।

वियतनाम में दिखता है भारतीय संस्कृति का असर
मध्य और दक्षिण वियतनाम में आज भी भारतीय संस्कृति का असर साफ देखा जा सकता है। वहां चंपा मंदिरों को देखें तो दोनों संस्कृतियों के बीच निकटता झलकती है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ डा. त्रिदीब चक्रबर्ती के अनुसार- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान गैर-उपनिवेशवाद और निर्गुट की साझा धारणा के कारण दोनों देशों के नेता एक-दूसरे के करीब आए और मैत्री, सहयोग और समझ के आपसी संबंधों की ठोस नींव रखी। भारत, अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के खिलाफ वियतनाम के राष्ट्रवादी संघर्ष में उसका समर्थन करता रहा है। वियतनाम के स्वतंत्रता आंदोलन के समर्थन में रैलियां भी कीं। कोलकाता की गलियों में उन दिनों ‘अमार नाम, तोमार नाम, वियतनाम, वियतनाम’ (मेरा नाम, तुम्हारा नाम और हम सभी का नाम है वियतनाम) एक लोकप्रिय नारा था। दो सदियों तक दोनों देशों में समान विचार वाला संबंध रहा है। डॉ. चक्रबर्ती के अनुसार- शीत युद्ध के दौरान भी भारत ने वियतनाम के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे। तब दोनों देशों के मध्य सामरिक हितों में समानता थी, जिसके परिणामस्वरूप दोनों के बीच आपसी सहयोग की भावना विकसित हुई।