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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2021: कमजोर होते हैं बच्चों के अधिकार, चार साल में दो गुनी हो गई बाल श्रमिकों की संख्या

locationनई दिल्लीPublished: Jun 12, 2021 10:11:21 am

Submitted by:

Shaitan Prajapat

एक रिपोर्ट के दुनिया भर में पिछले चार साल में बाल श्रमिकों की संख्या 84 लाख से बढ़ कर 1.6 करोड़ तक हो गई है। अब इन बच्चों की संख्या कुल बाल श्रमिकों की संख्या की आधी से ज्यादा हो गई है।

World Child Labor Prohibition Day
World Child Labor Prohibition Day

नई दिल्ली। हर साल दुनियाभर में 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour 2021) के रूप में मनाया जाता है। दुनियाभर में आज ऐसे लाखें बच्चे है जो मजदूरी करने के लिए मजबूर है। अपने नाजुक कंधो से बोझा ढोकर अपने परिवार का पेट पाल रहा है। अपने देश में दशकों से बालश्रम एक गंभीर समस्या बनी हुई है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने का उद्देश्य यह है कि ऐसे बच्चों की पहचान करें और उनकी मदद के लिए आगे। ये काम करने के लिए कई एनजीओ और संस्थाए है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है।

क्या है बाल श्रम
छोटे छोटे बच्चों को मेहनत का काम करवाया जाता है और इसके बदले में उनको कुछ पैसे दिए जाते है। कई जगह बिना भुगतान के ही बच्चों से मजदूरी करवाई जाती है। बाल श्रम केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, यह एक वैश्विक घटना है। भारतीय संविधान के अनुसार किसी उद्योग, कल-कारखाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक श्रम करने वाले 5 से 14 वर्ष उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाता है। छोटे बच्चों को काम करना गैरकानूनी है।

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चार साल में बाल श्रमिकों की संख्या हो गई 1.6 करोड़
एक रिपोर्ट के दुनिया भर में पिछले चार साल में बाल श्रमिकों की संख्या 84 लाख से बढ़ कर 1.6 करोड़ तक हो गई है। आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक 5 से 11 साल की उम्र के बाल श्रम में पड़े बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। अब इन बच्चों की संख्या कुल बाल श्रमिकों की संख्या की आधी से ज्यादा हो गई है। वहीं 5 से 17 साल तक के बच्चे जो खतरनाक कार्यों के संलग्न हैं वे साल 2016 से 65 लाख से 7.9 करोड़ तक हो गए हैं।

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भारत में बाल श्रम निषेध दिवस
अपने देश में बाल श्रम व्यापक स्तर पर देखने को मिलता है। सबसे खास बात बाल श्रम के साथ मजदूरी के लिए बच्चों की तस्करी भी की जाती है। इस मामले केंद्र और राज्य सरकारें अपने अपने स्तर पर कई प्रकार कार्य कर रहे है। साल 1986 में बालश्रम निषेध और नियमन अधिनियम पारित किया गया। इस अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम कराना गैर-क़ानूनी घोषित किया गया है। इसके साथ ही भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 बच्चों को खतरनाक उद्योग और कारखानों में काम करने की अनुमति नहीं देता है। जबकि धारा 45 के अंतर्गत देश के सभी राज्यों को 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य किया गया है।

दुनिया से बालश्रम को खत्म करना आसान नहीं
5 से 17 आयु वर्ग के कई बच्चे ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें सामान्य बचपन से वंचित करते हैं। दुनिया से बालश्रम को खत्म करना आसान नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण आर्थिक अपराध के साथ सामाजिक समस्या भी है। इतना ही नहीं बच्चों के जीवन तक से खिलवाड़ होता है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि बाल श्रम पीढ़ियों की बीच की गरीबी को बढ़ाता है, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती देता है और बाल अधिकार समझौते के द्वारा गारंटी के तौर पर दिए अधिकारों को कमजोर करने का काम करता है।

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