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विश्व पर्यावरण दिवसः जल की कमी और अधिकता दोनों से जूझ रहा भारत, ये है मर्ज का इलाज

भारत में बारिश की कमी और अधिकता दोनों ही मुसीबत बन जाती है। अतिरिक्त पानी से भूजल स्तर बढ़ाकर दोनों समस्याओं को हल किया जा सकता है।

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Rain Water Harvesting

विश्व पर्यावरण दिवसः जल की कमी और अधिकता दोनों से जूझ रहा भारत, ये है मर्ज का इलाज

नई दिल्ली। 5 जून को हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। मौजूदा दौर में पर्यावरण संबंधी चुनौतियों में जल संकट एक बेहद गंभीर मुद्दा है। जल की उपलब्धता के मामले में अल्प और अति दोनों ही संकट की स्थितियां हैं। भारत में जल प्रबंधन में खामियों के चलते दोनों के हालात हर साल देखने को मिलते हैं।

कहीं बूंद-बूंद के लिए संघर्ष, कहीं हर बूंद बन रही मुसीबत

कुछ इलाकों में एक-एक बूंद पानी के लिए कई किलोमीटर चलना और फिर घंटों का इंतजार करना पड़ता है, महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके से इस समस्या को आसानी से समझा जा सकता है। हालात इतने बुरे हैं कि कई बार पानी के संघर्ष में लोगों की जान तक चली जाती है। वहीं महज कुछ घंटों की बारिश से भी कई बार जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। मुंबई में हो रही समस्याएं इसका बड़ा उदाहरण है। ऐसे में बारिश के दौरान अतिरिक्त जल के प्रबंधन को लेकर कदम उठाने जरूरी हैं।

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हर काम सरकार करे जरूरी नहीं एक कदम आप उठाइए

देश की हर समस्या के लिए हम अक्सर सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन समस्याओं का समाधान काफी हद तक हमारे हाथ में होता है। यदि हम बरसात के दौरान आने वाले अतिरिक्त पानी का संचय करें तो पानी की कमी और अधिकता दोनों का हल मिल सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी बारिश में छतों के पानी का संचय इसमें सबसे मददगार कदम साबित हो सकता है।

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...ऐसे करें रेन वाटर हार्वेस्टिंग

रेन वाटर हार्वेस्टिंग का सीधा-सा मतलब बारिश के पानी की मदद से भूजल का स्तर बढ़ाना होता है। इसके लिए इमारतो की छतों पर जमा होने वाले पानी को पाइप के जरिए जमीन में उतारा जाता है। अक्सर एक साथ तेज बारिश होने से पानी जमीन के ऊपर जमा हो जाता है, जिसे जमीन में उतरने में समय लगता है। इसी के चलते बाढ़ की समस्या हो जाती है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग से काफी मात्रा में पानी को सीधे जमीन में उतारा जा सकता है। इससे दोनों समस्याओं का हल मिल सकता है।