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पृथ्वी से टकरा सकता है यह बड़ा क्षुद्रग्रह, स्ट्रेरॉयड के हर गतविधि पर वैज्ञानिकों की नजर

वैज्ञानिकों का दावा है कि 65 साल बाद 2084 में पृथ्वी से टकरा सकता है क्षुद्रग्रह यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी ने इस क्षुद्रग्रह की जानकारी दी है

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नई दिल्ली। अंतरिक्ष के बारे में जानने के लिए दुनिया के तमाम वैज्ञानिक तरह-तरह के शोध कर रहे हैं और वर्षों से नई-नई जानकारी दुनिया के सामने देते रहे हैं। पृथ्वी से बाहर कई ऐसे रहस्यों को पता चला है, जिस पर आज भी वैज्ञानित लगातर उन रहस्यों को सुलझाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अब ऐसी ही एक जानकारी सामने आई है, जिसे लेकर वैज्ञानिक अभी से चिंतित हैं। दरअसल, यह जानकारी सामने आई है कि पृथ्वी से एक बड़ा क्षुद्रग्रह (Large Asteroid) टकरा सकता है। इसे लेकर वैज्ञानिकों में हलचल है।

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पृथ्वी के चारों ओर हजारों उल्कापिंड (meteorite) और स्ट्रेरॉयड चक्कर काट रहे हैं, जो समय-समय पर धरती के पास से भी गुजरते रहते हैं, जिसके कारण पृथ्वी से टकराने की संभावनाएं भी बनी रहती है।

ऐसा ही साल 2013 और 2016 में हुआ जब दो से तीन छोटे-बड़े उल्कापिंड और ग्रह पृथ्वी के पास से गुजरे, हालांकि पृथ्वी से नहीं टकराया। लेकिन अब यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) ने एक जानकारी देते हुए बताया है कि 2084 में एक बड़ा क्षुद्रग्रह (Large Asteroid) पृथ्वी से टकरा सकता है। इसे लेकर वैज्ञानिकों में अभी से ही चिंता बढ़ गई है।

हर छोटे-बड़े उल्कापिंडों और स्ट्रेरॉयड पर वैज्ञानिकों की नजर

बता दें कि यूरोपीय स्पेस एजेंसी की ओर से एक रिपोर्ट जारी की जाती है, जिसमें उल्कापिंडों और स्ट्रेरॉयड की सभी जानकारीयां बताई जाती है।

इसे लेकर दुनिया की तमाम अंतरिक्ष एजेंसियां एक-दूसरे से जानकारियां साझा करते हैं। अब जो उल्कापिंड पृथ्वी के करीब से गुजरने वाला है और 2084 यानी 65 साल बाद टकराने की संभावना जताई जा रही है, उसके बारे में बताया गया है।

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ESA ने अनुमान लगाते हुए बताया है कि उल्कापिंड पृथ्वी से लगभग 73,435 मील की दूरी पर, चंद्रमा की कक्षा (239,000 मील) की दूरी से गुजरेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि दूसरे ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण खिंचाव से यह उल्कापिंड सीधे पृथ्वी के वायुमंडल में आ सकता है।

फिलहाल वैज्ञानिक इसपर नजर रख रहे हैं। लेकिन ऐसा भी मान रहे हैं कि इसे नष्ट करने के लिए किसी मिसाइल की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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