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उत्तर कोरिया को लेकर अमरीका कोई राहत देने को तैयार नहीं

अमरीकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के खिलाफ और एक साल के लिए राष्ट्रीय आपातकाल बढ़ा दिया है।

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Mohit Saxena

Jul 17, 2018

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उत्तर कोरिया को लेकर अमरीका कोई राहत देने को तैयार नहीं

वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक तरफ विश्वास है कि उत्तर कोरिया परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर सकारात्मक पहल करेगा। वहीं दूसरी ओर वह उत्तर कोरिया को कोई राहत देने के मूड में नहीं हैं। अभी तक अमरीका की ओर से उत्तर कोरिया को कोई राहत नहीं मिली है।अमरीकी राष्ट्रपति ने उत्तर कोरिया के खिलाफ और एक साल के लिए राष्ट्रीय आपातकाल बढ़ा दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि यह देश अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा,विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के लिए असामान्य और असाधारण खतरा बना हुआ है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया और चीन के बीच काफी नजदीकियां रही हैं। चीन हमेशा से ही उत्तर कोरिया को मदद से देता रहा है। ऐसे में चीन की शह पर उत्तर कोरिया अपने वादे से डगमगाने का डर बना हुआ है। अमरीका को भय है कि चीन की मदद से कहीं उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियारों को नष्ट न करे।

दबाव बढ़ाना जारी रखेंगे

ट्रंप ने यह टिप्पणी सिंगापुर में किम जोंग उन के साथ हुई वार्ता के दो हफ्ते से भी कम समय बाद की है। 12 जून को हुई शिखर वार्ता में उत्तर कोरियाइ नेता किम जोंग उन परमाणु निरस्त्रीकरण पर सहमत हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि परमाणु निरस्त्रीकरण पूरा होने तक वह अपना दबाव जारी रखेंगे। वह उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई प्रतिबंध खत्म नहीं करेंगे। उत्तर कोरिया के खिलाफ राष्ट्रीय आपातकाल पहली बार 26 जून, 2008 को लागू किया गया था,तब से हर अमरीकी राष्ट्रपति इसे एक साल के लिए बढ़ाते चले आ रहे हैं।

चीन सबसे खास दोस्त

हाल ही में उत्तर कोरिया के तानाशाह ने चीन को अपना सबसे खास दोस्त बताया था। सिंगापुर की वार्ता के बाद किम ने दोबारा चीन का दौरा किया। इससे पहले वह सिंगापुर की यात्रा से पहले भी किम चीन गए थे। ऐसे में यह देखने को मिल रहा है कि उत्तर कोरिया चीन के बताए रास्ते पर चल रहा है। उसके हर फैसले में चीन का दखल होता है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी नोटिस में ट्रंप ने कहा कि कोरियाइ प्रायद्वीप में मौजूदगी और हथियारों के प्रसार का खतरा के साथ ही उत्तर कोरियाइ सरकार की कार्रवाई और नीति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर असामान्य एवं असाधारण खतरा बनी हुई है।