अमरीकी वैज्ञानिक ने की इंडिया की तारीफ, कहा- भारत की वैक्सीन ने कोरोना महामारी से पूरी दुनिया को बचाया

HIGHLIGHTS

  • अमरीका के एक टॉप वैज्ञानिक डॉ. पीटर होट्ज ने कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की कोरोना वैक्सीन ने पूरी दुनिया को इस महामारी से बचाया है।
  • डॉ. पीटर ने कहा वैक्सीन का रोलआउट होना पूरी दुनिया के लिए भारत की ओर से उपहार जैसा है। ऐसे में भारत के योगदान को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।

वाशिंगटन। कोरोना महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है और अब तक इस वायरस के प्रकोप से पूरे विश्व में लाखों लोगों की जान जा चुकी है, तो वहीं करोड़ों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि, दुनिया के करीब 100 से अधिक देशों में टीकाकरण अभियान की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आने के बाद से अभी भी चिंता बनी हुई है।

दुनियाभर में चल रहे कोरोना टीकाकरण अभियान में भारत ने एक अहम भूमिका निभाई है। लिहाजा, अब अमरीका भी तारीफ करने को मजबूर है। अमरीका के एक टॉप वैज्ञानिक ने कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत की कोरोना वैक्सीन ने पूरी दुनिया को इस महामारी से बचाया है।

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बता दें कि कोरोना महामारी के इस संकट में भारत ने दुनिया के कई देशों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराया है तो कई देशों ने भारत से वैक्सीन खरीदी है। ऐसे संकट की घड़ी में भारत ने कोरोना वैक्सीन बनाकर दुनिया के लोगों को बचाने का काम किया है। कोरोना महामारी के दौरान भारत को फॉर्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा गया।

भारत के योगदान को कम नहीं आंका जा सकता

बता दें कि अभी हाल ही में एक वेबिनार के दौरान ह्यूस्टन में डॉ. पीटर होट्ज ने कहा कि भारत में बनी वैक्सीन दुनिया भर के देशों में सप्लाई की जा रही है। बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन (BCM) के नेशनल स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के डीन डॉ. पीटर होट्ज ने वेबिनार को संबोधित करते हुए आगे कहा कि mRNA के दो टीके दुनिया के निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्रभावित नहीं कर सकते हैं, जबकि भारत की वैक्सीन जो ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी के सहयोग से बनी है और पूरी दुनिया में सप्लाई हो रही है।

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ऐसे में भारत के योगदान को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वैक्सीन का रोलआउट होना पूरी दुनिया के लिए भारत की ओर से उपहार जैसा है। आपको बता दें कि भारत ने दो स्वदेशी वैक्सीन (कोविशील्ड और कोवैक्सीन) को मंजूरी दी है।

एस्ट्राज़ेनेका से लाइसेंस प्राप्त करने के बाद कोविशील्ड का प्रोडक्शन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कर रही है। वहीं, कोवैक्सीन पूरी तरह से स्वदेशी टीका है और भारत बायोटेक और इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। भारत अब तक दो दर्जन से अधिक देशों को वैक्सीन की सप्लाई कर चुका है।

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Anil Kumar
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