
नई दिल्ली। भारत और चीन एशिया के दो घोषित ताकतवर राष्ट्र हैं। तय है कि दोनों मुल्कों के बीच द्विपक्षीय मुद्दों को लेकर तनातनी का असर एशियाई राष्ट्रों के साथ वैश्विक स्तर पर भी हो सकता है। 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध में इस तनाव को कम करने के लिए 1988 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने चीन का अचानक दौरा कर सभी को चौका दिया था। उस समय इसका नतीजा यह निकला कि दोनों देशों ने एक-दूसरे को मॉस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा दिया। इससे न केवल व्यापार को बढ़ावा मिला बल्कि राजनयिक संबंधों में भी सुधार हुए। अब उसी तनाव को करीब 30 साल बाद वुहान में पीएम मोदी और शी जिनपिंग चीन अनौपचारिक मुलाकात के जरिए खत्म करना चाहते हैं। ताकि दोनों देश मिलकर एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकें।
नई विश्व व्यवस्था के लिहाज से भी बैठक अहम
इस मुलाकात का आइडिया पिछले साल हुई ब्रिक्स समिट के दौरान सामने आया था। डोकलाम की तनातनी के दौर में भी मोदी और जिनपिंग चीन के श्यामेन शहर में एक दूसरे से मिले थे। अब वुहान में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात जून में प्रस्तावित शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। ये शिखर सम्मेलन चीन के किंगदाओ शहर में होगा। वुहान में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात हो, इससे पहले भारत ने संबंधों को सामान्य करने के लिए बड़ी कोशिशें की हैं। तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा भी दोनों की मुलाकात को एक अच्छा कदम बता चुका हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, द्विपक्षीय और क्षेत्रीय संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि चीन और भारत के बीच व्यापार असंतुलन है। भारत की कोशिश होगी कि इसे दूर किया जाए।
यूं बनीं मुलाकात की बात
पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की इस अनौपचारिक मुलाकात का ऐलान पिछले हफ्ते विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की चीन यात्रा के दौरान हुई है। सुषमा स्वराज वहां द्विपक्षीय मुलाकात और शंघाई कोऑपरेशन आर्गनाइजेशन के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने गई थीं। चीन में सुषमा की राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी समेत कई बड़े नेताओं से मुलाकात हुई। उसी दौरान अनौपचारिक मुलाकात को लेकर फैसला हुआ। सुषमा स्वराज की इस मुलाकात के दौरान भारत और चीन 2018 में ब्रह्मपुत्र और सतलज नदियों पर दोबारा डेटा साझा करने पर सहमत हुए। डोकलाम विवाद के बाद 2017 में चीन ने हाईड्रोलॉजिकल डेटा नहीं साझा किया था। चीन इस साल नाथुला रूट से कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी दोबारा शुरू करने पर राजी हुआ है। सुषमा के अलावा रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी इसी हफ्ते शंघाई सहयोग संगठन में रक्षामंत्रियों के सम्मेलन भी हिस्सा लिया था। सीतारमन की चीन के रक्षामंत्री वेई फेंग से अलग से मुलाकात भी हुई। अब भारत-चीन के बीच द्विपक्षीय मिलिट्री एक्सरसाइज दोबारा शुरू होने की संभावना जताई जाने लगी है। डोकलाम विवाद के बाद 2017 में चीन में होने वाली साझा सैन्याभ्यास नहीं हो सका था।
अहम मुद्दों पर चर्चा आज
आपको बता दें कि पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर वार्तांओं का दौर आज एक बजे से शुरू हो जाएगा। पीएम मोदी गुरुवार की देर रात चीन के वुहान शहर पहुंच चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा के दौरान दोनों पक्ष द्विपक्षीय, अंतर्राष्ट्रीय एवं आपसी हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग के बीच 27 और 28 अप्रैल को चीन के वुहान शहर में शिखर बैठक होगी। दो दिनों में दोनों के पांच से छह बार मुलाकात होने की संभावना है। चीन की यात्रा पर रवाना होने से पहले मोदी ने ट्वीट कर अपने यात्रा की जानकारी आम जनता को दी। उन्होंने लिखा कि मैं चीन के वुहान की यात्रा पर जा रहा हूं जहां 27 और 28 अप्रैल को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक होगी।
Published on:
27 Apr 2018 10:08 am
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