दुनिया को एक नहीं कई बार डस चुके हैं खतरनाक वायरस, जानें महामारी का इतिहास

  • भारत समेत पूरी दुनिया में कोरोना वायरस मचा रहा तबाही
  • विश्व में कोरोना से पहले कई खतरनाक बीमारियां बनी संकट

नई दिल्ली। भारत समेत पूरा विश्व इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है। इसी का नतीजा है कि कोरोना की वजह से अब तक 14.4 लाख लोग काल के गाल में समा चुके हैं। अकेले भारत में ही 1.36 लाग कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया है। हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं है, जब दुनिया किसी महामारी की चपेट में आई हो। इससे पहले हैजा, प्लेग, चिकनपॉक्स, इंफ्लूएंजा जैसे खतरनाक वायरस मानव जीवन के संकट खड़ा कर चुके हैं। मानव इतिहास में आईं ये महामारियां 30 से 50 करोड़ लोगों की डस चुकी हैं।

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जानिए इतिहास की सबसे बड़ी वैश्विक महामारियों के बारे में

HIV एड्स

एचआईवी एड्स भी इन्हीं महामारियों में से एक है। 1976 में अफ्रीकी देश कॉन्गों से शुरू हुई बीमारी ने धीरे—धीरे समूची दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया। शुरू के साल में ही एचआईवी से 3.6 करोड़ लोगों की मौत हो गई। मौजूदा समय में भी लगभग 3.5 करोड़ लोग एचआईवी पॉजिटिव हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश लोग अफ्रीकी देशों से ताल्लुक रखते हैं। साल 2005 से 2012 के बीच एक ऐसा समय भी आया, जिसमें एचआईवी का सबसे ज्यादा प्रकोप दिखाई दिया। आज भी यह बीमारी लाइलाज है।

फ्लू महामारी

हांगकांग फ्लू जिसको दूसरी श्रेणी के फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। 1968 में इस बीमारी के सबसे पहले 13 मामले हांगकांग में मिले थे। लेकिन इसके फैलने की गति इतनी तेज थी कि यह 17 दिनों के भीतर सिंगापुर और वियतनाम पहुंच गया। हांगकांग फ्लू का जन्म H3N2 कीटाणु की वजह से हुआ है। यह एक बार का इंफ्लूएंजा था। केवल तीन महीनों के भीतर ही भारत और अमरीका समेत दुनिया के कई बड़े देश इसकी जद में आ चुके थे। इस बीमारी का डेथ रेट 5 प्रतिशत रहा, लेकिन हांगकांग में इसने ऐसा कहर बरपाया कि वहां पांच लाख लोग यानी 15 प्रतिशत लोगों की मौत हो गई।

एशियन फ्लू

हांगकांग फ्लू से ही मिलती जुलती बीमारी 1956 में आई, जिसका नाम एशियन फ्लू रखा गया है। यह भी एक ए ग्रेड का इंफ्लूंजा है। जिसकी फैलने की वजह H2N2 है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट की मानें तो इस बीमारी ने 20 लाख लोगों की जान ले ली, जिसमें लगभग 70 हजार अकेले अमरीका से ही थी। एशियन फ्लू का सबसे ज्यादा असर सिंगापुर, हांगकांग और अमरीका में दिखाई दिया।

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फ्लू

इंफ्लूंजा भी मानव इतिहास के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। यह 1918 की बात है, जब घातक इंफ्लूंजा ने पूरी दुनिया को अपनी जद में ले लिया। इस बीमारी से ढ़ाई करोड़ लोगों की जान चली गई। जबकि 50 करोड़ लोग इससे बुरी तरह से प्रभावित हो गए। इस इंफ्लूंजा की खास बात यह थी कि यह अधिकांश युवाओं को अपनी चपेट में लेता था और जो किसी तरह इसकी चपेट से बाहर निकल जाते थे, उनका इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर हो जाता था।

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हैजा (कॉलेरा)

हैजा उन बीमारियों से एक है, जिसने भारतियों को सबसे अधिक प्रभावित किया। शुरुआती दौर में ही इस खतरनाक बीमारी ने 8 लाख भारतीयों की जान ले ली। हालांकि मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पूर्वी यूरोप और रूस भी इससे प्रभावित हुए बिना न रह सके।

द ब्लैक डेथ
साल 1346 में जिस बीमारी ने सबसे ज्यादा हाहाकार मचाया, उसका नाम था प्लेग। चूहों से फैलने वाली इस बीमारी ने अफ्रीका और एशिया में ज्यादा तबाही मचाई। एक जानकारी के मुताबिक प्लेग से 7.5 करोड़ से 20 करोड़ लोगों की मौत हुई। यह बीमारी जहाजों के माध्यम से एक देश से दूसरे देशों में पहुंची।

जस्टिनियन का प्लेग
प्लेग की तरह ही जस्टिनियन का प्लेग भी दुनिया के लिए काल बनकर आई। इस बीमारी मानें यूरोप की आधी आबादी को डस लिया। जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित बिजेटिनियन साम्राज्य और मेडिटेरिनियन पोर्ट रहा। बीमारी के पहले साल में ही 2.5 करोड़ लोग इसके शिकार हो गए।

 

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Mohit sharma
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