
taj mahal
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ताजमहल को अपनी पर्यटन सूची से बाहर करने का फैसला लिया है। इसकी आलोचना भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में तो हो ही रही है, वैश्विक मीडिया भी इसमें पीछे नहीं है। चूंकि देश के बाहर भारत की पहचान में शुमार इमारतों में ताजमहल का स्थान सबसे ऊपर है, इसलिए वैश्विक मीडिया को योगी सरकार का यह फैसला चौंकाने वाला लग रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग ने हाल ही में जो बुकलेट जारी की है, उसमें ताजमहल का नाम नहीं है।
ताजमहल पर सीएम के विचार हैं अलग: बीबीसी
"बीबीसी" ने इस बारे में लिखा है कि "यह पर्यटन विभाग का प्रचार करने वाली बुकलेट नहीं थी। यह बुकलेट योगी आदित्यनाथ की सरकार के छह महीने पूरे होने पर जारी की गई थी। बुकलेट में उत्तर प्रदेश के मौजूदा और भविष्य के पर्यटन प्रोजेक्ट की जानकारी दी गई थी। इनमें गोरखपुर का मंदिर भी शुमार हैं, जहां के मुख्यमंत्री योगी प्रमुख महंत हैं।" बीबीसी ने योगी आदित्यनाथ के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा है कि "ताजमहल के बारे में उनके विचार अलग हैं। वे जून में कह चुके हैं कि ताजमहल भारतीय संस्कृति का प्रतीक नहीं है।" बीबीसी ने अपनी खबर में ताजमहल की बुकलेट में गैरमौजूदगी पर सोशल मीडिया पर उठे बवाल को भी जगह दी है।
क्यों की जा रही है ताजमहल की उपेक्षा: वाशिंगटन पोस्ट
इसी तरह "वाशिंगटन पोस्ट" ने सवाल उठाया है कि "क्या भारत में ताजमहल की इसलिए उपेक्षा की जा रही है, क्योंकि वह मुस्लिमों ने बनवाया था?" अखबार ने लिखा है कि "हाल के वर्षों में ताजमहल प्राथमिकता में शुमार नहीं रहा है। इस ऐतिहासिक इमारत को देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या गिरी है और वायु प्रदूषण के कारण यहां के प्रसिद्ध सफेद संगमरमर का रंग पीला हो रहा है।" अखबार ने राज्य सरकार की तीखी आलोचना करते हुए लिखा है कि "भारत में कुछ लोग कहते हैं कि हाल ही में चुनी गई हिंदुत्ववादी सरकार इस विश्व प्रसिद्ध इमारत के रखरखाव के लिए इसलिए धन मुहैया नहीं करा रही है क्योंकि इस मकबरे को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने बनवाया था।" "वाशिंगटन पोस्ट" ने यह भी लिखा है कि "भारत के सबसे बड़े पर्यटन आकर्षण को आगामी वर्ष के राज्य बजट में कोई सांस्कृतिक धरोहर फंड नहीं दिया गया है।"
रीता बहुगुणा का जवाब
हालांकि इसके जवाब में राज्य की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने पर्यटन विभाग के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा है कि "ताजमहल और आगरा का विकास भारत सरकार और प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया है कि सरकार ने इसके ढांचागत सुधार के लिए 156 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है।"
मुस्लिम होने के कारण दरकिनार: द टाइम्स
इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई अखबार "द टाइम्स" ने "ताजमहल को अत्याधिक मुस्लिम होने के कारण किया दरकिनार" शीर्षक से लिखा है- "ताजमहल को स्थानीय आकर्षणों की सूची से संदिग्ध ढंग से बाहर कर दिया गया है, इससे इस मुस्लिम विरासत पर विवाद उठ खड़ा हुआ है।" साथ ही अखबार ने लिखा है, "इसके बजाय सरकार मथुरा के मंदिर और वाराणसी के गंगा घाटों को प्रोत्साहित कर रही है।" अखबार ने योगी आदित्यनाथ की ताजमहल की आलोचना को भी प्रमुखता से छापा है। इसमें लिखा है कि "आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि भारत आने वाले गणमान्य व्यक्तियों को ताजमहल और अन्य मीनारों की प्रतिकृतियां भेंट की जाती हैं, जो भारतीय संस्कृति को प्रतिबिंबित नहीं करती हैं।"
दुनिया का अजूबा: द इंडेपेंडेंट
ब्रिटेन के "द इंडेपेंडेंट" ने इस बारे में लिखा है- "ताजमहल दुनिया के सात अजूबों में शुमार है, लेकिन यह उत्तर प्रदेश की नई पर्यटन सूची के प्रमुख आकर्षणों में शुमार नहीं है।"
Published on:
04 Oct 2017 06:44 pm
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