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मालिक के इंतजार में कुत्ते ने किया दस साल इंतजार,फिल्में बनाकर दुनिया ने दी सलामी

वो हर दिन अपने मालिक का स्टेशन पर इंतजार करता और ट्रेन के गुजर जने के बाद वापस चला आता।

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Hachiko

नई दिल्ली।कुत्ता एक ऐसा जीव है जो कि मरते दम तक मालिक के प्रति अपनी वफादारी निभाता है। आज हम हचीको नाम के एक कुत्ते के बारे में बताएंगे जिसने कि वफादारी की ऐसी मिसाल पेश की जिसकी कायल पुरी दुनिया हो गई। ये बात साल 1924 की है जब ईज़बूरो ईनो टोक्यो यूनिवर्सिटी में एग्रीकल्चर साइंस के प्रोफेसर थे। ईज़बूरो को अकीटा ब्रीड के कुत्ते का बहुत शौक था और ओडेट शहर में उन्हें इसी बीड का एक प्यारा सा पपी मिला। उस कुत्ते का नाम हचीको था।

प्रोफेसर ईनो उसे प्यार से हची कहकर बुलाते थे। हचीको उन्हें बहुत चाहता था और प्रोफेसर ईनो भी हचीको को अपने बेटे की तरह प्यार करने लगे। ये प्यार इतना गहरा था कि हचीको प्रोफेसर ईनो को रोजना सेंट्रल टोक्यो के शिबूया रेलवे स्टेशन तक छोडऩे जाता था। हचीको प्रोफेसर के लौटने तक स्टेशन पर ही घ्ंाटो इंतजार करता था और ये रोज की बात थी।

21 मई साल 1925 को हर रोज की तरह स्टेशन पर बैठकर अपने मालिक के इंतजार में बैठा था लेकिन उसक मालिक नहीं लौटा क्योंकि यूनिवर्सिटी में लेक्चर के दौरान सेरेब्रल हैमरेज से उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रोफेसर के गॉर्डनर हचीको को गोद लिया लेकिन इसके बाद भी अपने मालिक के प्रति उसका प्यार कम नहीं हुआ और वो हर दिन अपने मालिक का स्टेशन पर इंतजार करता और ट्रेन के गुजर जराने के बाद वापस चला आता।

हैरान करने वाली ये थी कि हचीको ने ये काम 9 साल, 9 महीने और 15 दिन तक किया और वो भी बिना किसी रूकावट के। 18 मार्च साल1935 को हचीको की टर्मिनल कैंसर की वजह से मौत हो गई। मौत के बाद हचीको की समाधि ईनो की समाधि के पास ही बनाई गई। हचीको और उसके मालिक के बीच इस प्यार के ऊपर देश-विदेश में कई फिल्में भी बन चुकी है।