
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने पाकिस्तान को एकबार फिर लताड़ लगाई है। भारत ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दा उठाने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एक असफल देश है और लोकतंत्र एवं मानवाधिकार के मामले में उनसे भारत को सीखने की कोई जरुरत नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 37वें सेशन के दौरान भारत ने हाफिस सईद को पाकिस्तान में पनाह देने और उस पर कार्रवाई ना करने को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान में आतंक फल-फूल रहा है, क्योंकि ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में विशेष सुरक्षा प्राप्त थी और अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी हाफिज सईद को भी पाकिस्तान पनाह दे रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा, जिसे 'पाक' भूमि बनना था वह 'शुद्ध आतंक' की जमीन बन गया है। कुमम ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की मुख्य समस्या है आतंकवाद, जिसे पाकिस्तान और उसके इलाकों से लगातार समर्थन मिल रहा है और वह उसे अपने नियंत्रण में कर रहा है।
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विफल देश में शामिल है पाकिस्तान
आपको बता दें कि भारत ने इस दौरान पाकिस्तान में हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों समेत अल्पसंख्यकों की जबरन शादी व धर्म परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया। साथ ही मुंबई, पठानकोट और उरी हमले के अपराधियों को सजा दिलाने की भी मांग की। जेनेवा में भारत की संयुक्त राष्ट्र मिशन की दूसरी सचिव मिनी देवी कुमम ने कहा, ‘‘पाकिस्तान में आतंकी फल-फूल रहे हैं और भयमुक्त होकर सडक़ों पर इधर-उधर घूम रहे हैं, भारत में मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर हमने उनका भाषण सुना था।’’ उन्होंने आगे कहा, हम 2008 मुंबई हमले और 2016 पठानकोट समेत उरी हमले में शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए पाकिस्तान सरकार की ओर से विश्वसनीय कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। कुमम ने कहा कि दुनिया को लोकतंत्र और मानवाधिकार पर ऐसे किसी देश से कोई पाठ नहीं चाहिए, जिसकी खुद की हालत बेहद खराब हो। उन्होंने पाकिस्तान को विफल देश करार दिया।
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पहले पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करे पाकिस्तान
बताते चलें कि पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र उपस्थायी प्रतिनिधि ताहिर अंद्राबी ने कहा था कि कश्मीर समस्या का मुख्य बिंदु जनमत का फैसला होना चाहिए, जिसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने प्रदान किया था और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के माध्यम से जनमत संग्रह कराया जाना चाहिए। इस पर कुमम ने जवाब देते हुए कहा कि जम्मू एवं कश्मीर पर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का जिक्र करता रहा है, हालांकि वह यह भूल जाता है कि इस प्रस्ताव के तहत उसे पहले पाक अधिकृत कश्मीर को खाली करना होगा। 1972 शिमला समझौते व फरवरी 1999 को लाहौर घोषणा पत्र के तहत वह अपनी अन्य प्रतिबद्धताओं से मुकर जाता है।
Updated on:
16 Aug 2018 10:52 am
Published on:
10 Mar 2018 11:07 pm
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