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खाड़ी शांति मिशन पर तेहरान पहुंचे जापानी पीएम शिंजो आबे, क्या करा पाएंगे अमरीका-ईरान के बीच सुलह?

जापान के प्रधानमंत्री 12 जून को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे इस यात्रा के दौरान आबे की कोशिश वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की होगी करीब चार दशकों (41 साल) बाद किसी जापानी प्रधानमंत्री की पहली ईरान यात्रा

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टोक्यो। अमरीका और ईरान के बीच जारी तनाव को अब जापान का सहारा है। जापान के प्रधानमंत्री बुधवार यानी 12 जून को ईरान पहुंचे हैं। आपको बता दें कि यह यात्रा कई मायनों में खास है। दरअसल, इस दौरान आबे वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता कर शांति स्थापित करने की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही यह करीब चार दशकों बाद किसी जापानी प्रधानमंत्री की पहली ईरान यात्रा होगी।

अमरीका और ईरान के बीच सुलह की बात

शिंजो आबे ने बुधवार को ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी से मुलाकात की। इसके साथ ही गुरुवार को आबे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई से मुलाकात निर्धारित की गई थी। उनकी इस यात्रा के दौरान सबकी नजर इस बात पर होगी कि आबे किस तरह युद्ध के मुहाने पर खड़े अमरीका और ईरान के बीच सुलह कराते हैं।

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अमरीका-ईरान में तनाव का कारण

बता दें कि बीते वर्ष अमरीका द्वारा ईरान को परमाणु समझौते से बाहर किए जाने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। अमरीका ने समझौता रद्द करने के बाद ईरान पर भारी प्रतिबंध लगाया। इसके साथ ही दुनिया के बाकी देशों से ईरान से तेल न खरीदने की चेतावनी दी थी। अब संभावना जताई जा रही है कि आबे दोनों देश के बीच सुलह कराने के लिए ईरान के प्रमुख नेताओं से बातचीत करेंगे। इस बारे में कैबिनेट सचिव योशिहिदे सुगा ने कहा था कि 'हमें यकीन है कि यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि तनाव को कम करने के लिए प्रमुख क्षेत्रीय ताकत के नेतृत्व से बातचीत की जाए, ताकि परमणु समझौता बहाल हो सके। साथ ही क्षेत्र में स्थिरता हो सके।'

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12 से 14 जून के बीच यात्रा

आबे की 14 जून तक ईरान में होंगे। इस रिपोर्ट में हम आपको उन पहलुओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस कारण जापान के उसके मकसद में कामयाब होने की संभावनाएं स्थापित होती हैं। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया जा रहा है कि आबे की छवि पर इस मामले का क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है। नीचे दी गई बिंदुओं से समझिए आबे की यह यात्रा किस लिहाज से खास है-

- जापान इस वक्त अमरीका के उन खास सहयोगी में से एक है, जिसके काफी लंबे समय से ईरान से भी नजदीकियां हैं। ऐसे में आबे एक आदर्श मध्यस्थ साबित हो सकते हैं।

- अमरीका भी चाहता है कि जापान इस मामले में हस्तक्षेप करे। पिछले महीने अपनी जापान यात्रा के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के संकेत दिया था। उन्होंने कहा था कि तेहरान और टोक्यो के बीच 'काफी अच्छे संबंध' हैं। ऐसे में उन्हें लगता है कि ईरान बातचीत करने को तैयार होगा और ईरान ऐसा करेगा तो अमरीका भी पीछे नहीं हटेगा।

- जापान खुद भी मध्यपूर्वी क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करना चाहता है। दरअसल, जापान ईरान से भारी मात्रा में तेल आयात करनेवाला देश है, लेकिन अमरीका द्वारा लगाए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसे खरीददारी बंद करनी पड़ी है।

- ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि आबे दोनों देशों को सीधी बातचीत के लिए राजी करा सकते हैं। जिसके बाद दोनों देशों के शीर्ष नेता किसी अन्य देश जाकर बैठक कर सकते हैं।

- संभावना यह भी है कि आबे दोनों देशों के संदेश एक दूसरे को पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। आबे G20 समिट में ईरान को न्यौता देकर मध्यस्थता कर सकते हैं।

- जापान का ध्यान सैन्य कार्रवाई के बजाए वाणिज्यिक और राजनयिक संबंध पर अधिक रहने के कारण ऐसी संभावना है कि तेहरान जापान की बात पर अधिक गौर कर सकता है।

- अगर आबे अपने इस मकसद में सफल होते हैं, तो उनकी छवि शांति के लिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय राजनेता के रूप में उभरेगी। हालांकि, बातचीत असफल होने पर भी उनके लिए अधिक क्षति वाली बात नहीं है।

- इससे पहले आबे रूस के साथ एक विवादित द्वीप और उत्तर कोरिया के साथ अगवा किए जापानी नागरिकों के मामले में डील कर सफलता हासिल कर चुके हैं। इस कारण उन्हें सत्ता में मजबूती मिली थी। अगर आबे अमरीका-ईरान मुद्दे में भी सफल होते हैं, तो उन्हें इसका फायदा आने वाले चुनाव में भी मिलेगा।

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