
नई दिल्ली। जासूसी की बात जब भी हम करते हैं तो हमारे दिमाग में शरलॉक होम्स या फिर करम चंद या फिर ब्योमकेश बख्शी का ही नाम आता है लेकिन हम बता दें कि जासूसी की दुनिया का सबसे मशहूर नाम है मार्गरेट गीर्तोईदा जेले जिसे माता हारी के नाम से भी जाना जाता है। इतिहास में उन्हें तकरीबन पचास हजार लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया है और इतना ही नहीं उनके ऊपर जर्मनी के लिए जासूसी करने का भी गंभीर आरोप था। कहा जाता है कि माता हारी के कई सारे प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंध थे।
माता हारी को जेले के नाम से भी जाना जाता है। वो न केवल एक मशहूर जासूस थी बल्कि वो एक प्रख्यात डांसर भी थी। इतनी लोकप्रिय थी कि बड़े से बड़ा राजनेता और सेना के प्रमुख उनका डांस देखने के लिए आते हैं। फस्र्ट वल्र्ड वॉर के दौरान जेले पेरिस में एक डांसर और स्ट्रिपर के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर थी। इस दौर में वो एक देश की सीक्रेट इफोर्मेशन को इधर से उधर करने का काम करती थी और अपने इस काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्होंने अपनी अदाओं का भरपूर इस्तेमाल किया। उनकी अदाओं के कायल बहुत लोग थे।
बता दें कि जर्मन के प्रिंस सहित और भी कई लोग उनके मुरीद थे। माताहारी का जन्म साल 1876 में नीदरलैंड में हुआ था और वो पेरिस में पली-बढ़ी।जेले की शादी नीदरलैंड की शाही सेना के एक अधिकारी से हुई थी, जो उस वक्त इंडोनेशिया में तैनात था। दोनों तत्कालीन डच ईस्ट इंडीज के द्वीप जावा में रह रहे थे। इंडोनेशिया में ही वो एक दूसरे किसी डांस कंपनी में शामिल हो गईं और वहां उसने अपना नाम बदलकर माता हरी कर लिया।
साल 1907 में माता हरी ने नीदरलैंड्स लौटने के बाद अपने पति को तलाक दे दिया और पेरिस चली गईं। पेरिस में वो एक साल तक किसी फ्रेंच राजनीतिज्ञ के साथ रही और इसी दौरान फ्रांस की सरकार ने उन्हें जासूसी करने के लिए राजी किया हालांकि इस काम के बदले में उन्हें मुंह मांगी रकम दी गई।
प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान माता हरी को हथियार बना कर फ्रांस ने जर्मन मिलिट्री ऑफिसर्स की कई सारी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की थी लेकिन कहते हैं कि लालच बुरी बला और इसी लालच के चलते उसने फ्रांस की भी कई महत्वपूर्णजानकारियां जर्मनी से शेयर की और इस तरह वो डबल गेम खेल रही थी और दोनों से ही अपने काम के पैसे ले रही थी लेकिन सच के बाहर आने में ज्य़ादा देर नहीं लगती और फ्रांस के खूफिया एजेंसी को इस बात की भनक लग गई और माता हारी को साल 1917 में गिरफ्तार कर लिया गया और इसके बाद ही उन्हें 50 हजार लोगों के मौत का जिम्मेदार ठहराया गया और 15 सितंबर, 1917 में गोलियों से भूनकर मौत देने की सजा मिली। इस भयंकर डबल गेम के चक्कर में मात्र 41 वर्ष की आयु में ही माता हारी को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा।
Published on:
24 Feb 2018 05:44 pm
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