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बांग्लादेश से रोहिंग्याओं की वापसी के लिए म्यांमार में हालात ठीक नहीं : संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि म्यांमार के संकट ग्रस्त क्षेत्र रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है।

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नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र एक बार रोहिंग्या मुसलमानों की घर वापसी को लेकर चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि म्यमांर के संकट ग्रस्त क्षेत्र रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी के लिए अनुकूल स्थिति नहीं है। हालांकि म्यांमार ने कहा है कि बांग्लादेश से रोहिंग्याओं की वापसी के लिए हम बिल्कुल पूरी तरह से तैयार हैं।

बांग्लादेश में शरणार्थी हैं रोहिंग्या

बता दें कि म्यांमार में सेना की कार्रवाई से बचने के लिए करीब 7 लाख रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश में शरणर्थी के तौर पर रह रहे हैं। रोहिंग्याओं ने चोरी-छिपे सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण लिया है, हालांकि करीब 40 हजार रोहिंग्या भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी रह रहे हैं। रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार सेना और सरकार पर हत्या और बलात्कार का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि म्यांमार की सेना ने रोहिंग्याओं द्वारा लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। सेना ने कहा है कि 15 अगस्त को म्यांमार में हुए हमले के खिलाफ रोहिंग्या आतंकियों के खिलाफ की गई एक वैध कार्रवाई है। यह कार्रवाई सभी रोहिंग्याओं के खिलाफ नहीं है।

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बांग्लादेश-म्यांमार के बीच प्रत्यर्पण संधि

आपको बता दें कि म्यांमार और बांग्लादेश की सरकार ने नवंबर में एक प्रत्यर्पण संधि किया था जिसके तहत सभी रोहिंग्याओं को वापस लौटना था, लेकिन अभी तक एक भी रोहिंग्या शरणार्थी वापस अपने देश म्यांमार नहीं लौटे हैं।

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6 दिन के दौरे पर म्यांमार पहुंची उर्सूला म्यूलर

इधर संयुक्त राष्ट्र ने रोहिंग्याओं के वापस न लौटने को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। यूएन के मानवीय विषयक समन्वय कार्यालय की महासचिव उर्सूला म्यूलर ने कहा है फिलहाल म्यांमार में स्थितियां स्वैच्छिक, मर्यादित और टिकाऊ वापसी के लिए अनुकूल नहीं हैं। बता दें कि अपनी 6 दिन के दौरे पर म्यांमार पहुंची म्यूलर ने कहा कि यहां घूमने-फिरने की आजादी, सामाजिक सौहार्द, आजीविका और सेवाओं तक पहुंच जैसे अहम मुद्दों को हल करने की सख्त जरुरत है। उर्सुला म्यूलर ने कहा कि हम रखाइन राज्य में रह रहे 4 लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों की दिक्कत नहीं भूल सकते हैं, जो एक गुलाम की जिंदगी जीने को विवश हैं।

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