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इस तीर्थ स्थल पर कभी अंग्रेजों ने गोलियों से की थी मासूमों की हत्या, आज है पाकिस्तान का हिस्सा

पंजाब प्रान्त के ननकाना साहिब जिले में स्थित ये गुरूद्वारा पहले गुरू नानक के नाम पर था

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Nankana Sahib Gurudwara

नई दिल्ली। आज हम आपको सिख धर्म के एक ऐसे तीर्थस्थल के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि पाकिस्तान में स्थित है। इस पावन तीर्थस्थल को ननकाना साहिब गुरूद्वारा के नाम से जाना जाता है। इस गुरूद्वारे का इतिहास काफी दर्दनाक रहा है।

बता दें कि पंजाब प्रान्त के ननकाना साहिब जिले में स्थित ये गुरूद्वारा पहले गुरू नानक के नाम पर था और उनका जन्म भी इस शहर में ही हुआ था। साल 1921 में ब्रिटिश शासकों के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन की शुरूआत की गई थी और उसी दौरान ननकाना साहिब गुरुद्वारे में एक सभा का आयोजन किया गया था।

स्थानीय लोग एकदिन बड़े ही शान्तिपूर्ण ढ़ंग से सभा का पालन कर रहे थे लेकिन तभी वहां अंग्रेज पहुंच गए और भरी सभा में ही गोलियों की बौछार कर डाली।

इस दौरान करीब 70 लोगों को बड़ी ही बेरहमी से अपनी जान गंवानी पड़ी। ये हत्याकांड जालियांवाला बाग हत्याकांड के महज दो सालों के अंदर ही हुआ था जिससे लोग अंग्रेज सरकार के खिलाफ बहुत बुरे तरीके से भड़क गए थे।

आज से करीब 97 साल पहले हुए इस हत्याकांड आज भी लोगों के ज़ेहन में जि़ंदा है। बता दें कि ननकाना साहिब का नाम पहले राय भोई दी तलवंडी था।

उस वक्त राय बुलर भट्टी उक्त इलाके का शासक था। गुरु नानकदेव की आध्यात्मिक रुचियों की पहचान सबसे पहले उनकी बहन नानकी और राय बुलर भट्टी ने ही किया था और तो और राय बुलर जी तलवंडी शहर के पास करीब बीस एकड़ जमीन गुरूनानक को तोहफे के रूप में दिया था और बाद में उस भेंट को ननकाना के नाम से जाना जाने लगा।

लमहाराजा रणजीत सिंह ने गुरु नानकदेव के जन्म स्थान पर गुरुद्वारे का निर्माण करवाया जो ननकाना साहिब गुरुद्वारा के नाम से प्रसिद्ध है। यहां मुख्य गुरूद्वारा सहित नौ और गुरूद्वारे भी हैं। ननकाना साहिब गुरूद्वारा में भक्तों का हमेशा तांता लगा रहता है।