
नई दिल्ली। इंसान बोल सकते हैं, दर्द में चीख-चिल्ला सकते हैं, अपना दुख दूसरों से ज़ाहिर कर सकते हैं लेकिन आपको अगर बोल दिया जाए कि आज से आपको एक जानवर की जिंदगी जीनी है तो आपको कैसा लगेगा? सोचिए ज़रा अगर आपके पास आपका परिवार ना हो आपके दोस्त ना हों कोई आपका गम बांटने वाला ना हो तो आप कैसे जी पाएंगे? इस संसार में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें दूसरों का दर्द नहीं दिखाई देता ऐसे लोगों का दिल किसी के लिए नहीं पिघलता फिर चाहें वह इंसान हो या कोई जानवर। हम आपको एक ऐसे हाथी की कहानी बताने जा रहे हैं जो किस्मत का मारा है उकसे साथ इतना बुरा हुआ है की अब वो बेहद दुखी रहता है।
इस हाथी को दुनिया के सबसे दुखी कहते हैं। इस हाथी का नाम नोसी है। यह बहुत छोटा था जब इसे अमेरिका से जिम्बाब्वे एक सर्कस में भरती करने के लिए लाया गया। नोसी के चेहरे से और हाव-भाव से ही लग जाता है की वह कितना दुखी है। नोसी को बचपन में अमेरिका से जिम्बाब्वे लाया गया उसे उसके परिवार से जुदा कर दिया गया। जानवर हो या इंसान हर जीव को कोई ना कोई चाहिए होता है जो उसके साथ रहे। फिर नोसी के साथ ये अन्याय क्यूँ किया गया उसकी क्या गलती थी। नोसी को जिम्बाब्वे में इसे सर्कस में कलाबाजियां दिखाने के लिए रखा गया। नोसी कहानी ऐसी है जिसे अगर हम अपने लिए सोचें तो रूह कांप जाएगी। 1984 में अमेरिका में नोसी के सामने उसके पूरे परिवार को मार दिया गया। 35 साल का यह हाथी पिछले तीन दशकों से ग्रेट अमेरिकन फैमिली सर्कस में अपनी कलाबाजियां दिखा रहा है।
सर्कस में जो भी नोसी को देखता है पहली ही नज़र में सामने वाले को नोसी का दुख उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे जाता है। नोसी को सर्कस में करतब करने के लिए मजबूर किया जाता है, 35 साल के नोसी को अर्थराइटिस भी है फिर भी उससे काम करवाया जाता है। उसे एक गंदी जगह पर बाँध कर रखा जाता है। अब PETA कानूनी तौर पर नोसी को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रहा है। इंसान क्यों इतना निर्मम होता जा रहा है की उसको दूसरों का गम नहीं दिखाई देता नोसी को उसके परिवार से अलग कर दिया गया और अब उसे इस जिंदगी को घुट-घुट के जीने पर मजबूर किया जा रहा है।
Published on:
13 Dec 2017 10:39 am
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