
नई दिल्ली। श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के लिए बुधवार का दिन खुशखबरी वाला रहा। बहुत समय से संसद में विक्रमसिंघे के खिलाफ चल रहे अविश्वास प्रस्ताव पर बड़ी जीत हासिल की है। संयुक्त विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को रानिल विक्रमसिंघे ने बड़ी आसानी अपने पक्ष में करके जीत लिया है।
विक्रमसिंघे पर लगे ये आरोप
बता दें कि संयुक्त पक्ष ने आरोप लगाया है कि 68 वर्षीय विक्रमसिंघे ने देश में वित्तीय अर्थव्यवस्था के बिगड़े हालात को संभाल नहीं पाए थे, जिसके चलते देश में मंदी का दौर चला था। पिछले साल देश की अर्थव्यवस्था में करीब 3.1 प्रतिशत की गिरावट भी आई थी।
उनके खिलाफ ये भी आरोप है कि वह पिछले महीने मध्य कांडी जिले में मुस्लिम विरोधी दंगों से निपटने में सफल नहीं हो पाए थे।
बुधवार को संसद में इस मामले पर चर्चा हुई और ये चर्चा श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व वाले एक समूह ने की थी।
विक्रमसिंघे के पक्ष में वोट
विक्रमसिंघे के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ 122 वोट पड़े जबकि पक्ष में 76 मत पड़े। जबकि 26 सदस्य सदन में उपस्थित नहीं थे।
बता देंं कि 76 सदस्यों ने विक्रमसिंघे का विरोध किया था। ये सभी सदस्य फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) से हैं और सरकारी पदों पर आसीन हैं। बता दें कि विक्रमसिंंघे 2015 से एक राष्ट्रीय एकता सरकार चला रहे है।
विक्रमसिंघे से मांगा था इस्तीफा
गौरतलब है कि 2015 में राजपक्षे को हराकर सिरीसेन श्रीलंका के राष्ट्रपति बने। सिरीसेन की पार्टी 'श्रीलंका फ्रीडम' विक्रमसिंघे के साथ गठबंधन में है। फरवरी में स्थानीय निकाय चुनाव में राजपक्षे की पार्टी से मिली हार के बाद सिरीसेन ने विक्रमसिंघे से इस्तीफा मांगा था। लेकिन, उन्होंने सिरीसेन के प्रस्वात को ठुकरा दिया था।
वहीं, विक्रमसिंघे की यूनाइटिड नेशनल पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने त्यागपत्र देने से इनकार कर दिया है। राज्य मंत्री हर्ष डी सिल्वा ने आरोप लगाया है कि सिरीसेना चाहते हैं कि विक्रमसिंघे पद से हट जाएं ताकि वह अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकें।
Updated on:
05 Apr 2018 09:53 am
Published on:
05 Apr 2018 09:48 am
बड़ी खबरें
View Allविश्व की अन्य खबरें
विदेश
ट्रेंडिंग
