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सीरिया की लड़ाई: इन वजहों से अब तक बचा हुआ है बशर अल असद

2011 में शुरू युद्ध में अब तक 3 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ईरान और अफानिस्तान के लड़ाकों का असद सरकार को मिलता रहा है साथ।

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bashar al asad

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दमिश्क। सीरियाई युद्ध में अब तक 3 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। 2011 में शुरू हुए इस युद्ध की शुरुआत सरकार विरोधी प्रदर्शन के साथ हुई थी। इसके बाद से विद्रोहियों और सरकार के बीच जंग छिड़ी हुई है। अब अमरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस भी इस युद्ध में कूद चुके हैं। गौरतलब है कि बशर अल असद सरकार को रूस का समर्थन है। ऐसे में विरोधियों को उसे मात देना कठिन हो गया है। इसके साथ उसे ईरान और अफानिस्तान के लड़ाकों का भी समय-समय पर साथ मिलता रहा है।

आधी हो चुकी है सेना

सीरिया के पास युद्ध से पूर्व करीब पांच लाख सैनिकों की मजूबत सेना थी। यह अब आधी हो चुकी है। इस सेना में इराक और अफगानिस्तान के आठ हजार से अधिक लड़ाके थे। इस सेना की मदद से 2015 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने दमिश्क, अलप्पो और होम्स जैसे शहरों को विद्रोहियों के कब्जे से छुड़ा लिया था। इसके साथ रूस के हवाई सैन्य मदद के बल पर भी उसे विद्रोह को दबाने में सफलता मिली थी।

इस्लामिक स्टेट ने दिया विद्रोहियों का साथ

खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआई ने सीरियाई सरकार को हटाने के लिए लंबा युद्ध लड़ा है। उसने हायात ताहिर अलशाम संगठन के साथ मिलकर बशर अल असद सरकार से युद्ध लड़ा। उसके साथ आने से विद्रोहियों की सेना करीब 1 लाख तक पहुंच गई थी। सीरिया को रूस का साथ मिलने के बाद आतंकियों का सफाया होने लगा।

कुर्द सैनिकों ने दिखाई अहम भूमिका

सीरियाई युद्ध में कुर्द सैनिकों ने अहम भूमिका निभाई है। अमेरिका और फ्रांस की तरफ से लड़ रही इस सेना ने आईएस के खात्मे के लिए आगे बढ़कर युद्ध किया। पीपल प्रोटेक्शन फोर्स के नाम से मशहूर इस सेना ने कई इलाकों से आतंकियों और विद्रोहियों को खदेड़ दिया। इससे बशर सरकार को अपने दुश्मनों से लड़ने में काफी मदद मिली।