
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएन) ने 27 जहाजों और 21 जहाज कंपनियों और एक शख्स को प्रतिबंधों को दरकिनार कर उत्तर कोरिया की सहायता करने के आरोप में 'ब्लैकलिस्ट' कर दिया है। इन कारोबारियों ने उत्तर कोरिया को उस पर लगे प्रतिबंधों से बचाने का भी प्रयास किया। इसे लेकर फरवरी 2018 में अमरीका ने इन कारोबारियों पर प्रतिबंध लगाने की संयुक्त राष्ट्र से मांग की थी। साथ ही तेल और कोयले जैसे कोरियाई माल की तस्करी पर भी चिंता जताई थी।
यूएन ने 37 कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया
बीबीसी के मुताबिक, शुक्रवार को घोषित किए गए नए प्रतिबंधों के जरिए न सिर्फ उत्तर कोरिया के शिपिंग ऑपरेशन को निर्देश दिए गए थे, बल्कि प्योंगयांग के साथ व्यापार करने वाली चीनी कंपनियों को भी निर्देश दिए गए थे। सूची में उत्तर कोरिया स्थित 16 कंपनियां, हांगकांग में पंजीकृत पांच कंपनियां, चीन की दो कंपनियां, ताइवान की दो और सिंगापुर व पनामा की एक-एक कंपनियां शामिल हैं।
2006 से उत्तर कोरिया के निर्यात में काफी कटौती आई
संयुक्त राष्ट्र के लिए अमरीकी राजदूत निक्की हेली ने कहा कि नवीनतम प्रतिबंध इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट है। तेल और कोयले जैसै उत्तर कोरियाई माल की तस्करी से निपटने के लिए अमरीका द्वारा पिछले महीने दिए प्रस्ताव के मद्देनजर शुक्रवार को यह कदम उठाया गया है। उत्तर कोरिया पर 2006 से लेकर अभी तक कई प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इनकी वजह से उत्तर कोरिया के निर्यात में काफी कटौती भी हुई है।
उत्तर कोरिया बहुत हद तक चीन पर निर्भर
बता दें कि हाल ही में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन सत्ता संभालने के बाद पहली बार किसी देश की यात्रा पर चीन पहुंचे थे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात काफी चर्चा में रही। जानकारों की माने तो उत्तर कोरिया के लिए चीन बेहद महत्वपूर्ण है। बाहरी दुनिया से जुड़े रहने के लिए उत्तर कोरिया बहुत हद तक चीन पर ही निर्भर है। किम जोंग-उन के चीनी दौरे से हटकर देखें तो इन दो देशों के बीच बहुत सी चीजों की अदला-बदली होती है और दोनों कई मायनों में एक-दूसरे के लिए अहम हैं। आने वाले दिनों में किम जोंग अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मिलेंगे।
Published on:
31 Mar 2018 08:57 pm
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