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चीन: माओत्से-तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता माने जाने वाले जिनपिंग बने आजीवन राष्ट्रपति

शी जिनपिंग को सर्वसम्मति से शनिवार को दोबारा राष्ट्रपति के तौर पर चुन लिया गया है।

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xi jinping

बीजिंग। शी जिनपिंग को सर्वसम्मति से शनिवार को दोबारा राष्ट्रपति के तौर पर चुन लिया गया है। इसके लिए चीन के विधायी निकाय नेशनल पीपल कांग्रेस, एनपीसी ने भी मंजूरी दे दी है। जिनपिंग का राष्ट्रपति पद पर यह दूसरा कार्यकाल है, जिस पर उन्हें 2023 तक रहना था। लेकिन अब एक विशेष प्रस्ताव के जरिए किसी भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल से दो साल की समय सीमा हटा दी गई है। इससे जिनपिंग का आजीवन राष्ट्रपति रहने का रास्ता साफ हो गया है। 64 वर्षीय शी को माओत्से-तुंग के बाद से सबसे शक्तिशाली चीनी नेता माना जाता है। इसके अलावा शी के खास साथी वांग क्यूशन को उपाध्यक्ष पद के लिए चुना गया है।

राष्ट्रपति पद के अलावा सैन्य आयोग के भी अध्यक्ष
मालूम हो कि राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में उन्हें 2970 वोट पड़े। इस दौरान सभी सांसद सदन में मौजूद थे। जिनपिंग को राष्ट्रपति पद के अलावा सैन्य आयोग का भी अध्यक्ष चुना गया है। वह पहले भी इस पद पर काम कर चुके हैं। वह सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख होने के साथ-साथ कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के अध्यक्ष भी हैं।

भ्रष्टाचार मिटाना प्राथमिकता
राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जिनपिंग की प्राथमिकता पार्टी और सभी राज्यस्तरीय कर्मचारी विभागों से भ्रष्टाचार को खत्म करना है। इसके लिए वह एक राष्ट्रीय निरीक्षक आयोग का गठन करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही धीमी अर्थव्यवस्था को अपग्रेड करने के लिए एक मजबूत विदेश नीति भी बनाई जाएगी। शी जिनपिंग और उनके सहयोगी हर सरकारी और गैर सरकारी विभागों पर नजर रखेंगे, जिससे वहां अव्यवस्था का माहौल न बन पाए।

आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता के चलते आया ये बदलाव
चाइनीज स्टडीज के प्रोफेसर एवं लंदन के किंग्स कॉलेज के लॉ चाइना संस्थान के निदेशक केरी ब्राउन ने कहा कि आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता के चलते ही जिनपिंग संविधान में संशोधन कर पाए हैं और इसके चलते ही आगे भी कई सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। बीजिंग में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश का विकास और स्थिरता सबसे महत्वपूर्ण है, इस संबंध में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। इससे देश के नागरिकों को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। ऐसे में कोई अन्य विरोध नहीं करेगा। ये राष्ट्र हित में है।