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41 दिन कैसे जमीन के अंदर जिंदा रहा ये शख्स देखिये वीडियो

आम आदमी से खास बने गेंदालाल को देखने के लिए उमड़ा जनसैलाब

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Lokesh Kumar

May 09, 2016

Samadhi

Samadhi

मुरादाबाद।
जिले में अन्धविश्वास को बढ़ावा देने का एक मामला सामने आया है। खुद को सन्त घोषित करते हुए गांव के एक साधारण युवक ने सिद्धि प्राप्त करने के लिए इकतालीस दिन समाधि में रहने का दावा किया था। आज इकतालीस दिन पूरे होने के बाद युवक को समाधि से बाहर निकाले जाने का वक्त आया तो सैकड़ों की तादाद में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। समाधि से बाहर निकले युवक को फिलहाल उसके घर में बने मन्दिर में रखा गया है। जहां युवक के दर्शनों के लिए सैकड़ों लोग जमा हैं। लोगों के विश्वास और आस्था के आगे विज्ञान की सारी दलीलें पानी मांग रही हैं। गांव में उत्सव का माहोल बना हुआ है और भक्ति में डूबे लोग जमकर चढ़ावा भी चढ़ा रहे हैं।


देखिये वीडियो-




आधुनिक समाज में विज्ञान ने भले ही इंसान के जीवन जीने के तरीके को बदल कर रख दिया हो, लेकिन विज्ञान के इस दौर में भी अन्धविश्वास पर यकीन करने वालों की कोई कमी नहीं है। ताजा मामला मुरादाबाद जनपद के मोहम्मदपुर बस्तौर गांव का है। जहां खुद को संत घोषित करने के लिए गांव में रहने वाले एक व्यक्ति ने पिछले इकतालीस दिनों से जमीन के अंदर समाधि ले रखी थी। ग्रामीणों के मुताबिक गेंदालाल शर्मा नाम का यह युवक खुद को हनुमान का भक्त बताता है और सिद्धि प्राप्त के लिए समाधि लिए हुए है।



इकतालीस दिन से समाधि के अंदर बगैर भोजन ओर पानी के रहे गेंदा लाल को आज समाधि से बाहर निकालने का दिन मुकर्रर किया गया था। गेंदा लाल की समाधि से बाहर आने की जानकारी लोगों को हुई तो आसपास के सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए। जिसके बाद समाधि की खुदाई कर गेंदालाल को बाहर निकाला गया। गेंदालाल को समाधि से बाहर निकाल कर उसके घर में बने हनुमान मन्दिर में रखा गया है। इकतालीस दिन जमीन के अंदर रहे गेंदालाल को फिलहाल रजाई से लपेटकर मन्दिर में रखा गया है। जहां उसको भगवान की सिद्धि प्राप्त होने का दावा कर रहे उनके भक्त आशीर्वाद लेने के लिए लाइनों में खड़े हैं।


आम आदमी से खास बन चुके गेंदालाल से आशीर्वाद लेने के साथ ही उनको चढ़ावा भी जमकर चढ़ाया जा रहा है। बिलारी थाना क्षेत्र में गेंदालाल के समाधि से बाहर आने की सूचना मिलने के साथ ही आसपास के गांवों से भी उनका आशीर्वाद लेने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। मोहम्मदपुर बस्तौर गांव में उत्सव सरीखा माहौल है। चारों तरफ भजन कीर्तन और जयकारों का उद्घोष सुनाई दे रहा है। गेंदालाल के परिजनों का दावा है की समाधि के अंदर जिस तरह इकतालीस दिन पहले गेंदालाल को बैठाया गया था। उसी स्थिति में आज भी गेंदालाल बैठे हुए मिले।


परिजन यह भी दावा कर रहे हैं कि गेंदालाल को समाधि के अंदर किसी तरह से ऑक्सीजन की सफ्लाई नहीं की गई थी और ना ही उन्हें खाना-पीना दिया गया था। कहते हैं विज्ञान और अन्धविश्वास के बीच एक महीन रेखा होती है, जिसे तोड़ने के लिए ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ता। आधुनिक दौर और विज्ञान के इस युग में भला कौन विश्वास करेगा की इकतालीस दिन कोई इंसान बगैर ऑक्सीजन और पानी के जीवित रह जाए, लेकिन अन्धविश्वास पर आस्था अपने आगे किसी भी तर्क को टिकने नहीं देती। गेंदालाल की हालत के बारे में परिजनों का दावा है की वो स्वस्थ हैं और उन्हें इलाज की जरूरत नहीं है।