6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तत्कालीन अखिलेश सरकार की सिफारिश कोर्ट में नामंजूर, विधायक समेत सपा नेताओं के केस नहीं होंगे वापस

Highlights: -छजलैट प्रकरण में कोर्ट में हुई सुनवाई -कोर्ट ने सभी दलीलों को किया खारिज -चार विधायक समेत सात नेताओं को कोर्ट से झटका

2 min read
Google source verification
default.jpeg

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

मुरादाबाद। छजलैट प्रकरण में आरोपी चार विधायकों समेत सात नेताओं को मुरादाबाद कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए केस वापसी की अर्जी को खारिज कर दिया है। जिसके बाद अब मामले को लेकर हाईकोर्ट में अर्जी डालने की बात कही जा रही है। दरअसल, एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट एडीजे पुनीत कुमार गुप्ता ने इस मामले में सुनवाई की। वहीं यूपी सरकार की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मुनीश भटनागर व एडीजीसी कौशल गुप्ता ने मामले की पैरवी की।

यह भी पढ़ें: उग्र हुआ किसानों का प्रदर्शन, सभी Toll Plaza पर कब्जा कर किया Free

यह भी देखें: तीर्थ यात्रियों के लिये यूपी में बना भव्य कैलाश मानसरोवर भवन

बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शील भटनागर, वीरेन्द्र शर्मा अधिवक्ताओं ने शासनादेश व कानूनी तर्कों को कोर्ट में प्रस्तुत किया। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बचाव पक्ष की सारी दलीलों को खारिज कर प्रार्थना पत्र को नामंजूर कर दिया। इस मामले में जानकारी देते हुए अधिवक्ता एम जलालुद्दीन ने बताया कि आठ दिसंबर को विशेष अदालत ने केस वापसी की अर्जी को खारिज कर दिया है। अब इसके लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।

यह भी पढ़ें: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक बार फिर मिली धमकी, मुकदमा दर्ज

ये है पूरा मामला

बता दें कि दो जनवरी 2008 में बसपा सरकार के दौरान रामपुर से सपा विधायक रहे आजम खान की गाड़ी की पुलिस ने तलाशी ली थी। जिसके बाद सपाइयों ने हाइवे जाम कर जमकर बवाल काटा था। पुलिस ने हाईवे जाम करने के मामले में कुल नौ लोगों के खिलाफ छजलैट थाने में मुकदमा दर्ज किया था। इनमें सपा सांसद आजम, मुरादाबाद देहात से विधायक हाजी इकराम कुरैशी, अमरोहा से महबूब अली, नगीना से मनोज पारस, नहटौर के नईमुल हसन के अलावा नेता राजेश यादव, डीपी यादव व राज कुमार प्रजापति का नाम शामिल है। वर्ष 2012 में तत्कालीन अखिलेश सरकार द्वारा मुकदमा वापसी के लिए सिफारिश भेजी गई थी। साथ ही आरोपितों की ओर से भी कोर्ट में इसी सिफारिश पर विचार करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था।