
Patrika sting: इन डॉक्टरों से इलाज कराने से पहले सोच लें, जा सकती है जान
मुरादाबाद: एक तरफ केंद्र सरकार आयुष्मान योजना के तहत करोड़ों लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सेवा लेने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वास्थ्य सेवा को पटरी पर लाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। अभी भी सूबे के अधिकतर जनपदों में झोलाछाप डॉक्टर ही स्वास्थ्य विभाग को चला रहे हैं। गरीब मजदूर किसान का इलाज करा रहे यह झोलाछाप डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अपनी दुकान है बेधड़क चला रहे हैं और मरीजों की जान से खेल रहे हैं। कुछ दिन पहले ही बिलारी तहसील के एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के कारण एक महिला की आंखों की रोशनी भी जा चुकी है उसके बाद भी जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। टीम पत्रिका ने ऐसे ही कुछ कथित झोलाछाप डाक्टरों की पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आइए आपको दिखाते हैं कुछ ऐसी तस्वीरें कुछ ऐसे झोलाछाप डॉक्टर जो खुलेआम कैमरे के सामने या कबूल ते हुए नजर आते हैं इन्होंने क्या कुबूल किया है कि उन्होंने डॉक्टरी की कोई भी पढ़ाई नहीं की है और ना ही उन्हें कोई तजुर्बा है बावजूद इसके जिला स्वास्थ्य विभाग के मिलीभगत से वह अपनी दुकान चला रहे हैं।
महज इतने पढ़े हैं डॉक्टर साहब
सबसे पहले हमने बिलारी के कसोरा गांव में 5-6 साल से मेडिकल शॉप और डॉक्टरी की प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने इंटर बायोलॉजी से कर रखा है इस आधार पर हो पिछले 5-6 साल से लगातार बिलारी के कचोरा गांव में प्रैक्टिस कर रहे हैं। झोलाछाप डॉक्टर का कहना है कि जिला अस्पताल से इरशाद नाम का व्यक्ति आता है और 2 से 3 हजार रुपये लेकर जाता है। झोलाछाप डॉक्टर का यह भी कहना है कि यह पैसा सीधे सीएमओ को जाता है। डॉक्टर का यह भी कहना है कि मुरादाबाद का कोई ऐसा देहात एरिया नहीं है जहां पर झोलाछाप डॉक्टर प्रैक्टिस ना कर रहे हो। डॉक्टर का कहना है कि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य विभाग द्वारा अगर कोई छापेमारी कार्रवाई होती है तो उसकी सूचना हमें पहले ही मिल जाती है और हम अपना क्लीनिक उस दिन बंद कर देते हैं।
बेख़ौफ़ हैं झोलाछाप
वहीं जब हमने झोलाछाप डॉक्टर हाशिम अली से बात की तो बेखौफ होकर उन्होंने हमारे सारे सवालों का जवाब दिया। हाशिम अली पिछले 1 महीने से प्रैक्टिस कर रहे हैं जबकि उनके पास किसी भी तरह की कोई भी डिग्री नहीं है जिससे वह डॉक्टरी की प्रैक्टिस कर सकें। हासिम अली का कहना है कि बिना पैसे के कोई भी झोलाछाप डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर सकता। हासिम अली का भी यही कहना है कि जिला अस्पताल से इरशाद आते हैं और हाशिम अली 3 हजार रुपये इरशाद को देते है।
चार साल से जारी है प्रैक्टिस
बिचौला ढोंगी में झोलाछाप डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रहा है मोहम्मद इरफान का कहना है कि वो बिचौला डूंगी में 4 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं। मोहम्मद इरफान का कहना है कि उन्होंने दरभंगा से पत्राचार द्वारा पेमेंट सीट पर होम्योपैथी डिग्री ले रखी है। उनका भी यही कहना है की इरशाद नाम का एक व्यक्ति आता है जोकि अपने को सीएमओ मुरादाबाद का चपरासी बताता है और 15 सो रुपए साल के मोहम्मद इरफान से लेकर जाता है। मोहम्मद इरफान का कहना है कि उससे पहले जिला अस्पताल के एच सी शर्मा को भी ही पैसे देते थे जब से उनका स्वर्गवास हुआ है तब से इरशाद ही इन से पैसे ले जाता है। मोहम्मद इरफान का कहना है कि एक दफा वह मुरादाबाद जिला अस्पताल आए थे और वहां पर डॉक्टर एचसी शर्मा डॉक्टर बैठते थे और वह झोलाछाप डॉक्टरों से पैसे लेते थे।
हाई स्कूल फेल डॉक्टर
वहीं जब टीम बिलारी के खोखरा गांव पहुंची तो वहां पर हमें एक हाई स्कूल फेल युवक डॉक्टर की प्रैक्टिस करते हुए मिला। उसका कहना है कि वह जहां पर प्रैक्टिस कर रहा है वहां पर पहले जो डॉक्टर प्रैक्टिस करते थे उनके प्रमाण पत्र को आधार बताते हुए वह खोखरा गांव में पिछले डेढ़ साल से प्रैक्टिस कर रहा है। युवक का यह भी कहना है कि घर में इनकम का कोई और माध्यम नहीं है और मृतक डॉक्टर का लड़का भी मंदबुद्धि है इसलिए वह उनकी डिग्री पर पिछले डेढ़ साल से प्रैक्टिस कर रहा है।
सीएमओ ऑफिस पर आरोप
वही जो हमने सोडाला में झोलाछाप डॉक्टरों से बात की तो एक डॉक्टर का कहना था कि सीएमओ के ड्राइवर आराम सिंह भी उनसे पैसे लेने आते हैं।
इतने रुपये में होता है सौदा
वहीं बिलारी तहसील के श्यामपुर बूढ़ी में प्रेक्टिस करने वाले झोलाछाप डॉक्टर गुड्डू का कहना है कि सीएमओ के ड्राइवर आराम सिंह द्वारा पैसे लिए जाते हैं और यह आश्वासन दिया जाता है कि आपके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। जबकि उनको यह पता है कि झोलाछाप डॉक्टर गुड्डू के पास किसी भी प्रकार का कोई भी सर्टिफिकेट या डिग्री नहीं है। उसके बावजूद 2 साल से 3000 प्रति साल के हिसाब से सीएमओ के ड्राइवर आराम सिंह द्वारा लिया जाता है और झोलाछाप डॉक्टरों को प्रेक्टिस करने की परमिशन दी जाती है।
ड्राईवर ने खोले कई नाम
सीएमओ के ड्राइवर आराम सिंह से फोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि इरशाद एसीएमओ के साथ उनकी गाड़ी से चेकिंग के दौरान रहता था। जिस कारण झोलाछाप डॉक्टर्स पर इरशाद का दबदबा था और लोग उसे पैसे देते थे। ड्राइवर आराम सिंह ने एसीएमओ ऑफिस में तैनात बाबू आखिल के साथ कुछ और भी नाम खोले है जो लोग झोलाछाप डॉक्टर से पैसे लेते है।
बहरहाल जिले में झोलाछाप और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से लोगों की जान से खिलवाड़ का ये खेल जारी है। अब देखना ये होगा कि स्वास्थ्य महकमा अपनी कुम्भकर्णी नींद से जागकर कार्यवाही कर पाता है या नहीं।
Published on:
16 Oct 2018 11:08 am
बड़ी खबरें
View Allमुरादाबाद
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
