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मिसाल: जनपद का ये सरकारी स्कूल दे रहा पब्लिक स्कूलों को टक्कर, बच्चों का मन नहीं करता घर जाने का

यहां बच्चों की पढाई इंग्लिश मीडियम माध्यम से शुरू हो गयी है,बल्कि बच्चों के लिए लाइब्रेरी और कंप्यूटर व स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई भी हो रही है।

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moradabad

मिसाल: जनपद का ये सरकारी स्कूल दे रहा पब्लिक स्कूलों को टक्कर, बच्चों का मन नहीं करता घर जाने का

जय प्रकाश@पत्रिका

मुरादाबाद: सूबे में खस्ताहाल प्राथमिक स्कूलों की दशा और उनमें मिल रही शिक्षा की गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। लेकिन इन्हीं में से कुछ सरकारी स्कूलों की सूरत ऐसी भी है जो ये यकीन दिलाती है कि अगर खुद शिक्षक और स्थानीय लोग चाहें तो सरकारी स्कूल भी पब्लिक स्कूलों को पछाड़ सकते हैं। जी हां कुछ ऐसी ही तस्वीर जनपद के ब्लाक मूंडापाण्डेय के गांव डिलरा रायपुर के प्राथमिक विद्यालय व जूनियर हाई स्कूल की। यहां न सिर्फ बच्चों की पढाई इंग्लिश मीडियम माध्यम से शुरू हो गयी है,बल्कि बच्चों के लिए लाइब्रेरी और कंप्यूटर व स्मार्ट बोर्ड से पढ़ाई भी हो रही है। साथ ही स्कूल की बिल्डिंग को भी आकर्षक बनाने के लिए स्कूल के शिक्षकों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। लेकिन अभी स्कूल के शिक्षक और ग्रामीण इसे और आगे ले जाना चाहते हैं जो पूरे सूबे के लिए मिसाल बन सके।

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स्कूल में मिला ऐसा नजारा

जब टीम पत्रिका डिलरा रायपुर के प्राथमिक विद्यालय पहुंची तो नजारा आम स्कूलों से अलग चौंकाने वाला था। यहां बच्चों को लंच के लिए बाकायदा मेस की वयवस्था थी,जिसमें बच्चे बर्तनों में आराम से बैठकर खा रहे थे। ऐसा द्रश्य अक्सर सरकारी स्कूलों से गायब रहता है। इसके अलावा बच्चों के लिए लाइब्रेरी में बच्चे पढ़ते भी मिले। विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुशवाह ने बताया कि उनके विद्यालय में बच्चों को उच्च गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दी जा रही है। बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर है। उन्हें सरल तरीके से अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है। साथ ही कंप्यूटर और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं भी दी जा रहीं हैं। यही नहीं स्कूल में मौजूद लाइब्रेरी को गांव के और भी बच्चों को पढ़ने की छूट है।

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साफ सफाई पर विशेष जोर

स्कूल में साफ़ सफाई के बेहद ध्यान रखा गया है। यही नहीं दीवारों पर भी ज्ञान भरे वाक्य लिखे गए हैं साथ ही उनसे सम्बंधित पेंटिंग भी की गयीं हैं। स्कूल में बच्चों के लिए स्विमिंग पूल भी है,जो बारिश की वजह से नहीं खोला गया था। स्कूल में बच्चों के लिए ओपन व आउट डोर गेम की भी बढ़िया व्यवस्था की गयी है।

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पूर्व प्रधान की सोच ने बदला स्कूल का नक्शा

यही नहीं इससे सटे जूनियर हाई स्कूल में भी इसी प्रकार की वयवस्था की गयीं थी। इसके पीछे की सोच गांव के पूर्व युवा प्रधान अजय वीर सिंह की थी। अजय वीर सिंह ने बताया कि उन्होंने महसूस किया था कि अगर हमारी बेसिक शिक्षा को मजबूत कर दिया जाए तो हमारे गांव के बच्चे कमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमने पूरे स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था की है। आने वाले समय में हम स्कूल में सीसीटीवी और साउंड सिस्टम लगवाना चाहते हैं ताकि प्रधानाचार्य अपने कमरे से पूरे स्कूल में निगाह रख सकें।